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विकलागता हारी जज्बे के सामने
Mar 07,2009 00:00
इस जज्बे को सलाम न कहा जाए तो क्या? मैट्रिक परीक्षा दे रहीं रानी व सुनैना दो ऐसी छात्राएं हैं जिनके सामने गरीबी व नेत्रहीनता बाधा नहीं बनी। धर्मवीर भी इनके जैसा ही है। परीक्षा में नेत्रहीनता बाधा न बने इसके लिए इन्हें परीक्षा समिति के नियमानुसार कॉपी लेखक मिले हैं। दोनों खुश है कि अब तक के पेपर अच्छे गए हैं। एमडीडीएम कालेज में परीक्षा दे रही रानी दास एवं सुनैना उन परीक्षार्थियों में हैं जो स्कूली शिक्षा की प्रथम परीक्षा में शामिल हैं। इन्हें सबसे अलग करता है इनका जच्बा क्योंकि नेत्रहीन एवं झोपड़पट्टी में रहने के बाद भी इस मुकाम तक पहुंची हैं। स्टेशन रोड की झोपड़पट्टी में रहने वाली रानी की मा रमावती चौका बर्तन [दाई] का काम कर परिवार का भरण-पोषण करती है। पिता पहले ही गुजर चुके हैं। मड़वन के बड़का गाव की रहने वाली छह में तीन नेत्रहीन भाई-बहनों में सुनैना दूसरी है जो स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रही है। इन सभी की पढ़ाई फरदो गोला स्थित शुभम विकलाग सेवा संस्थान में हुई। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के नियमानुसार नेत्रहीनों की कॉपी लेखन के लिए आठवीं पास लेखक की व्यवस्था की गई है। रानी दास के लिए निशा तथा सुनैना के लिए साक्षी कॉपी लेखिका बनी है। रानी एवं सुनैना बताती है कि अब तक के पेपर अच्छे गए हैं। चिंता इस बात को लेकर है कि उनके वाचन को लिखने वाली लेखिकाओं ने कितना शुद्ध लिखा, यह उन्हें पता नहीं? कॉपी जाच तो सामान्य छात्रों की तरह ही की जाएगी। शुभम विकलाग सेवा संस्थान की सचिव डॉ. संगीता अग्रवाल की माने तो इन लड़कियों के यहा तक पहुंचने पर उन्हें काफी खुशी होती है। |