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मन्ना डे: गायकों के बीच तुलना उचित नहीं
May 01,2009 00:00
हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध पार्श्वगायक मन्ना डे का मानना है कि समकालीन और वर्तमान गायकों के बीच तुलना करना कतई उचित नहीं हैं और हर पार्श्वगायक अपने दौर का प्रतिनिधि होता है। हिन्दी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर के प्रमुख पार्श्वगायक मन्ना डे ने कहा कि समकालीन अथवा दो अलग-अलग दौर के गायकों के बीच किसी भी प्रकार की तुलना करना कतई उचित नहीं है और इस तरह की कोशिश बेमकसद है ऐसा कभी नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर दौर का फिल्मी संगीत एवं पार्श्वगायक अपने दौर के प्रतिनिधि होते है जिनको एक दूसरे से जोड़ना किसी भी सूरत में ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि मुकेश, रफी और किशोर लौटकर नहीं आ सकते और आज के दौर के पार्श्वगायक, गायिकाएं और संगीतकार समसामयिक फिल्म संगीत के हिसाब से काम कर रहे हैं। आम तौर पर मीडिया से दूरी बनाए रखने वाले मन्ना दा ने कहा कि वह हमेशा मीडिया के साथ दूरी रखना पसंद करते हैं क्योंकि उनका मानना है कि मीडिया हमेशा गासिप और तथ्यहीन बातों को खबर बनाने की जुगत में रहता है जिसका कोई आधार नहीं होता। मन्ना डे के नाम से लोकप्रिय प्रबोधचंद्र डे का जन्म एक मई 1919 को कोलकाता में हुआ था। कुश्ती और मुक्केबाजी के शौकीन मन्ना दा ने संगीत की आरंभिक शिक्षा चाचा के सी डे उस्ताद दाबिर खां से ली। बाद में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम उन्होंने उस्ताद अमान अली खां और उस्ताद अब्दुल रहमान खां से हासिल की। रफी, मुकेश और किशोर से पहले मन्ना डे ने अपना पहला गाना 1943 में फिल्म तमन्ना के लिए सुरैया के साथ गाया था और इसी साल फिल्म रामराज्य के लिए एकल गीत रिकार्ड किया था। मन्ना दा ने अपना अंतिम फिल्मी गीत प्रहार के लिए गाया था। अपने पार्श्वगायिकी के सफर में मन्ना डे ने विभिन्न भारतीय भाषाओं में साढे़ तीन हजार से अधिक गाने रिकार्ड किए। उन्होंने फिल्मी संगीत के स्वर्णिम दौर के लगभग सभी संगीतकारों के साथ काम किया लेकिन मन्ना दा के पसंदीदा संगीतकार राहुल देव बर्मन थे जिनके बारे में वह कहते हैं कि आर डी के काम करने का तरीका सभी संगीतकारों से एकदम अलग था। एक बार मोहम्मद रफी ने मन्ना दा के बारे में संवाददाताओं से कहा था कि आप लोग मेरे गाने सुनते हैं और मैं केवल मन्ना डे को सुनता हूं। फिल्म संगीतकार शंकर बसंत बहार के लिए गाने रिकार्ड कर रहे थे और नायक पर फिल्माए जाने वाले युगल गीत केतकी गुलाब जूही.. के लिए मन्ना डे के साथ प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक भीमसेन जोशी को चुना। गाने की रिकार्डिंग के बाद पंडितजी ने कहा कि मन्ना दा आप एक बेहतरीन शास्त्रीय गायक बन सकते हैं। |