पता लगाएगी सरकार लापता लोगों का
Apr 04,2009 00:00
 नेपाल में एक दशक तक चले गृहयुद्ध के बाद माओवादी सत्ता में आए। सालों तक दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र रहा नेपाल राजशाही से मुक्त होकर गणराज्य बन गया। लेकिन गृहयुद्ध की कीमत चुकानी पड़ी आमलोगों को, जिसमें हजारों लोग मारे गए और सैकड़ों लापता हो गए। यहां की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लापता 434 लोगों के बारे में जानकारी देने के लिए कहा है।

सुप्रीम कोर्ट के प्रवक्ता हेमंत रावल ने गुरुवार को यह जानकारी दी। कोर्ट ने कहा है कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लापता नागरिकों को खोजे। सालभर पहले सत्ता में आए माओवादियों ने हथियार त्याग चुके हैं। 2006 से माओवादी समर्थित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी [पीएलए] संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाले कैंपों में रह रही है।

उधर, मानवाधिकार समूहों व परिवारों की मानें तो तत्कालीन शाही सेना व माओवादियों के बीच चले संघर्ष में करीब 13 हजार लोग मारे गए व सैकड़ों लापता हो गए। युद्ध के दौरान दोनों तरफ के लोगों पर अपहरण, प्रताड़ना, दुष्कर्म व हत्या जैसे कई आरोप हैं।