चिदंबरम: प्रभाकरण हमारा दुश्मन नहीं था
Jul 19,2010 00:00
 केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि तमिल विद्रोही संगठन लिट्टे का मारा गया नेता वी. प्रभाकरण हमारा दुश्मन नहीं था। वह प्रभाकरण से मिले थे और उससे चार घंटे तक बातचीत की थी। चिदंबरम शनिवार रात यहां एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

चिदंबरम ने कहा, हम उसके चुने रास्ते का विरोध करते थे। उसने यदि वर्ष 1987 में हुए भारत-श्रीलंका समझौते को स्वीकार कर लिया होता तो वह श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी प्रांतों का बेताज बादशाह होता। इस समझौते को स्वीकार करने के लिए भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उससे आग्रह किया था। विरुदनगर लिट्टे समर्थकों का गढ़ माना जाता है।

भारत में प्रतिबंधित लिंट्टे के हमदर्द एमडीएमके प्रमुख वाइको इसी क्षेत्र से चुनाव लड़ते रहे हैं। वाइको हालांकि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस प्रत्याशी मानिक टैगोर से 15 हजार मतों से हार गए थे।

चिदंबरम ने श्रीलंका में शांति लौटने का दावा करते हुए कहा कि आंतरिक रूप से विस्थापित तमिलों के हित के लिए भारत ने 3600 करोड़ रुपये दिए हैं। उत्तरी श्रीलंका में 50 हजार घरों के निर्माण के लिए सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये भी आवंटित किए हैं।