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हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू इशरत मुठभेड़ मामले की
Jul 15,2010 00:00
इशरत जहां मुठभेड़ मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की मांग करने वाली याचिका पर गुजरात हाई कोर्ट ने बुधवार से सुनवाई शुरू की। बचाव पक्ष के वकील ने इसे फर्जी मुठभेड़ करार देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट तमांग की रिपोर्ट के आधार पर गुजरात पुलिस के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए थी। 15 जून 2004 को अहमदाबाद के नरोड़ा इलाके में मुठभेड़ में मारी गई इशरत जहां की मां शमीमा कौसर की याचिका पर हाई कोर्ट के जज जयंत पटेल और अभिलाषा कुमारी की पीठ सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान शमीमा के वकील आई.एच. सैयद ने मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए कहा कि पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट पुलिस की मुठभेड़ की थ्योरी से काफी जुदा है। सैयद ने कहा, पुलिस ने एके-47 और सर्विस रिवाल्वर से गोलियां बरसाने की बात कही है जबकि इशरत और जावेद के शरीर पर एके-56 की गोलियां पाई गईं। इसके साथ ही एफएसएल रिपोर्ट में इशरत के हाथ धोने की बात भी कही गई है। सैयद ने कहा कि मजिस्ट्रेट तमांग की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में पूर्व डीजीपी के.आर. कौशिक, क्राइम ब्रांच के डीआईजी पी.पी. पांडे, पूर्व रेंज डीआईजी डी.जी. वंजारा समेत कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ ताजा प्राथमिकी दर्ज कराई जानी चाहिए थी। उन्होंने सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौशरबी के मामले का हवाला देते हुए कहा कि इशरत मुठभेड़ मामला भी सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ जैसा है, इसलिए इसकी जांच भी सीबीआई से कराई जानी चाहिए। |