पवार: विश्व क्रिकेट विभाजन की बातें बकवास
Jul 03,2010 00:00
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद [आईसीसी] के नवनियुक्त अध्यक्ष शरद पवार ने शुक्रवार को उपाध्यक्ष पद के लिए जान हावर्ड की उम्मीदवारी खारिज होने से विश्व क्रिकेट के विभाजन जैसी बातों को बकवास करार दिया।

इंग्लैंड के डेविड मोर्गन की जगह आईसीसी अध्यक्ष बने पवार ने सिंगापुर में आईसीसी कार्यकारी समिति की बैठक में पदभार ग्रहण किया और वह शुक्रवार सुबह मुंबई लौट आए। स्वदेश वापस लौटते ही केंद्रीय कृषि मंत्री पर सवाल दागा गया कि एशियाई क्रिकेट लाबी की वजह से हावर्ड की उम्मीदवारी खारिज हुई लेकिन उन्होंने विभाजन की बातों को नकारते हुए कहा कि इस पूर्व आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के पास लोकतांत्रिक तरीके से हुए चुनाव में पर्याप्त समर्थन मौजूद नहीं था।

उन्होंने कहा, 'उनके [हावर्ड] पास बहुमत नहीं था। किसी भी लोकतांत्रिक संगठन में बहुमत हासिल करना जरूरी होता है लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं था।' हावर्ड की उम्मीदवारी खारिज होने से विश्व क्रिकेट का विभाजन हो जाएगा, इस सवाल पर पवार ने कहा, 'मुझे ऐसा नहीं लगता। हमने इस मामले में आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड सहित सभी के साथ व्यक्तिगत रूप से विचार विमर्श किया और उसके बाद ही सामूहिक फैसला किया गया।' शरद पवार को अब दोहरी जिम्मेदारी निभानी होगी क्योंकि वह आईसीसी अध्यक्ष होने के अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री भी हैं लेकिन इस 69 वर्षीय राजनेता ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की थोड़ी सी सहायता के साथ ये जिम्मेदारियां बखूबी संभाल लेंगे।

उन्होंने कहा, 'सौभाग्यवश आईसीसी का मुख्यालय दुबई में है और दुबई में शनिवार और रविवार को काम होता है। इसलिए यह केवल दो घंटे की हवाई यात्रा की बात है। मुझे लगता है कि इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी। दूसरा मैं प्रधानमंत्री से अपनी जिम्मेदारियों के बारे में विचार-विमर्श करूंगा और उसके बाद कोई उचित निर्णय लूंगा ताकि मेरे सरकारी कार्यों पर असर नहीं पड़े।' पवार के मुताबिक, 'मैंने तीन मंत्रियों को देने की बात कही थी लेकिन मुझे एक ही दिया गया है। अगर मैं अपना काम कम करने का आग्रह करता हूं तो हमें कुछ समाधान हाथ लग सकता है। मैं नहीं चाहता कि सरकार में मेरा कार्य प्रभावित हो।'

आईसीसी अध्यक्ष के रूप में बड़ी चुनौतियों के बारे में बताते हुए पवार ने कहा, 'हमें खेल के हर प्रारूप को बचाए रखना है। आज कुल 105 देश आईसीसी के सदस्य हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि जब तक हम क्रिकेट को चीन, अमेरिका, पूर्वी यूरोप और अफ्रीका में नहीं फैलाते इसे विश्व के हर कोने में नहीं पहुंचाया जा सकता।'