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राजनीति कर रही सपा महिला आरक्षण पर
Mar 11,2010 00:00
एक समय समाजवादी पार्टी का गुणगान करते रहने वाले अमर सिंह अब पार्टी की निंदा करते नहीं थक रहे। पार्टी पर ताजा प्रहार करते हुए अमर ने महिला आरक्षण विधेयक पर पार्टी के रुख को सिर्फ राजनीति की संज्ञा दी है। अमर ने अपने ब्लाग पर लिखा है कि पिछले दिनों के संदर्भ में सबसे दु:खद सपा की नीतियां रहीं। पार्टी ने महिला आरक्षण का विरोध करके अपने संकीर्ण दृष्टिकोण का प्रदर्शन किया। जब पूरा देश विधेयक पर खुश है, तब कुछ संकीर्ण राजनीतिज्ञों ने विधेयक को नष्ट करने के लिए हरसंभव प्रयास किया। उन्होंने लिखा है कि सपा जब आरक्षण के अंदर आरक्षण की बात करती है तो मुझे लगता है कि वह राजनीति करने के अलावा कुछ और नहीं कर रही। सपा के शासनकाल में मेरठ की अग्रणी चिकित्सक सरोजिनी अग्रवाल को विधायक और रंजना वाजपेयी को प्रदेश महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने कहा कि दोनों महिलाएं समाज के संभ्रांत वर्ग से संबंधित हैं। अगर सपा मुस्लिम और पिछड़ी जाति की महिलाओं के प्रति इतनी चिंतित होती, तो रंजना की जगह पर कोई रेहाना और सरोजिनी की जगह पर कोई रामवती भिंड को लाया जा सकता था। अमर ने लिखा है कि वह पार्टी, जो तीन 'सी', कास्ट, कैश और क्रिमिनल से जुड़ी थी, अब तीन 'नहीं', महिलाएं नहीं, कंप्यूटर नहीं और अंग्रेजी नहीं, से जुड़ गई है। पार्टी की मध्यकाल की सोच परिवारवाद को लेकर ज्यादा चिंतित है, बजाए महिलाओं की दुर्दशा के। सपा के पूर्व नेता के मुताबिक ऐसा लग रहा है कि सपा अपने लिए कफन तैयार रही है, ताकि आगामी प्रदेश विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पार्टी की आत्मा को शांति मिल सके। अन्य पार्टियों की प्रशंसा करते हुए अमर ने कहा है कि राजनीतिक और विचारधारा संबंधी मतभेद के बाद भी हमें भाजपा, वाम दलों और कांग्रेस की प्रशंसा करनी चाहिए, जिन्होंने महिला विकास के लिए वास्तविक प्रयास किए। |