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चैंपियन बनाया बुलंद हौसले और मजबूत इरादों ने
Mar 17,2009 00:00
प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, इस बात को साबित किया है हिना नसरीन ने। सानिया मिर्जा को अपना आदर्श मानने वाली हिना किक बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक जीतने वाली राजधानी की पहली महिला खिलाड़ी हैं। बाहरी दिल्ली स्थित अलीपुर के जींदपुर गांव निवासी 14 वर्षीय हिना नसरीन जब अपनी पंच प्रैक्टिस करती हैं तो बड़ों-बड़ों के पसीने छूट जाते हैं। हिना राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किक बॉक्सिंग प्रतिस्पर्धा में कई पदक जीत चुकी हैं। फिलहाल वे 25 अप्रैल से 3 मई तक बैंकाक में आयोजित होने वाली फर्स्ट एशियन मार्शल की तैयारियों में जुटी हैं। गजब की स्फूर्ति व आत्मविश्वास की धनी हिना का लक्ष्य ताइक्वांडों में देश का प्रतिनिधित्व करना है। निम्नमध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली हिना नसरीन को अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कठिन परिश्रम करना होगा क्योंकि न तो उसके पास उच्च्चस्तरीय स्पोर्ट्स सुविधाएं हैं और न ही एक्सपर्ट कोच। अलीपुर स्थित स्टेडियम में रोजाना चार-पांच घंटे कड़ा अभ्यास करने वाली हिना अष्टांग योग संस्थान के कुलदीप सुमनाक्षर को अपना गुरु मानती हैं। 2007 में भूटान में हुए अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हिना को आजतक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है। न ही कोई निजी कम्पनी प्रायोजक के तौर पर आगे आई है। उसे बेहतर प्रशिक्षण की जरूरत है। हिना का कहना है कि उच्च्च स्तरीय प्रशिक्षण के अभाव में अधिकतर प्रतिभाएं दम तोड़ देती हैं। बहरहाल हिना की प्रतिभा और लगन को देखते हुए कमजोर माली हालत के बावजूद उसके पिता ने घर में ही उसके अभ्यास के लिए पंच किक प्रैक्टिस किट, सिम पेड व हेड गार्ड की व्वस्था की है। फिलहाल हिना बेहतर प्रदर्शन के लिए बुलंद हौसले के साथ अभ्यास में जुटी है। उसके पिता चमन शाह उसकी उपलब्धियों पर गर्व महसूस करते हुए कहते हैं, अभावों के बावजूद वे अपनी बेटी को वे हर सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश करेंगे। |