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लीपापोती का प्रयास रेड्डी मामले में
Sep 08,2009 00:00
अपनी वेबसाइट पर विरोधाभासी जानकारियां देने के बाद भारतीय नागरिक उड्डयन नियामक अब पिछले सप्ताह दुर्घटनाग्रस्त हुए उस हेलीकाप्टर की उड़ान योग्यता पर लीपापोती के काम में जुट गया है, जिसमें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी की मौत हो गई थी। मंगलवार को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय [डीजीसीए] की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार बेल-430 हेलीकाप्टर को पांच दिसंबर 2006 से पांच दिसंबर 2010 तक की उड़ान योग्यता का प्रमाणपत्र दिया गया था। हेलीकाप्टर का पहचान का चिन्ह वीटी-एपीजी था। बहरहाल हेलीकाप्टर दुर्घटना के एक दिन बाद तीन सितंबर को वेबसाइट पर कहा गया था कि उसे पांच जुलाई 2006 से चार जुलाई 2007 तक की अवधि का प्रमाणपत्र दिया गया था। यही नहीं ताजा जानकारी में कहा गया है कि प्रमाणपत्र 14 जनवरी 1999 को जारी किया गया जबकि तीन सितंबर की जानकारी के अनुसार इसे छह जुलाई 2006 को जारी किया गया था। दो सितंबर को हेलीकाप्टर के आधिकारिक तौर पर गायब होने वाले दिन डीजीसीए ने एक बयान जारी कर कहा था कि हेलीकाप्टर के पास उड़ान योग्यता का वैध प्रमाणपत्र था। प्रमाणपत्र की संख्या 2390 थी और इसकी समय सीमा 05-12-2010 तक थी। यह सूचना डीजीसीए की ताजा जानकारी से मेल खाती है लेकिन तीन सितंबर की सामग्री से असंगत है। नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने तीन सितंबर को कहा था कि डीजीसीए की वेबसाइट पर जो कुछ भी कहा जाए, हेलीकाप्टर उड़ान भरने के योग्य था। यहां यह संकेत करना उचित होगा कि उड़ान योग्यता का प्रमाण एक वर्ष के लिए और कुछ स्थितियों में दो वर्ष के लिए दिया जाता है लेकिन किसी भी हालत में चार वर्ष का उड़ान योग्यता प्रमाणपत्र नहीं दिया जाता जैसा कि डीजीसीए ने अपनी वेबसाइट पर ताजा जानकारी दी है। इस अंतर पर डीजीसीए ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। |