सामाजिक व आंतरिक सुरक्षा साथ-साथ
Jul 03,2009 00:00
 संप्रग सरकार ने आंतरिक सुरक्षा को सामाजिक सुरक्षा के साथ जोड़ कर तेजी से आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। हर नागरिक को खास राष्ट्रीय पहचान पत्र [यूआईडी] दिए जाने की योजना हो या फिर पुलिस व न्यायिक सुधार का मुद्दा, ये सभी केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में हैं। केंद्र ने आर्थिक समीक्षा में इन मुद्दों का प्रमुखता से जिक्र कर साफ कर दिया है कि सरकार आंतरिक सुरक्षा को सामाजिक सुरक्षा के साथ जोड़ कर चलेगी और इस मद में धन की जरा भी कमी नहीं आने देगी।

यूआईडी सामाजिक व आंतरिक सुरक्षा, दोनों से ही सीधे जुड़ी है। करीब एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च वाली इस अभिनव योजना के तहत देश के हर नागरिक को पहचान पत्र दिया जाना है। पहले चरण में गुजरात व महाराष्ट्र आदि समुद्र तटीय राज्यों में पहचान पत्र बनाने के लिए सर्वेक्षण शुरू हो चुका है। पहले चरण में सीमावर्ती इलाकों में ये कार्ड वितरित किए जाएंगे।

इस पहचानपत्र की खास बात होगी, इसमें व्यक्ति के अंगूठे के निशान से उसकी पहचान होगी और उसके बारे में हर जरूरी जानकारी एक चिप में मौजूद होगी। इससे विदेशी घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी और अवांछित तत्वों के बारे में पूरी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। यह कार्ड सिर्फ इसी उद्देश्य के लिए नहीं होगा, बल्कि यह बहुउद्देश्यीय स्मार्ट कार्ड होगा।

सरकार आंतरिक व सामाजिक सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ी पुलिस का चेहरा बदलने की कवायद भी तेज करने aकी कोशिश में है। आर्थिक समीक्षा में सरकार ने संकेत दिए हैं कि पुलिस सुधार की दिशा में सशक्त कदम उठाए जाएंगे। खास तौर से सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिए गए निर्देशों के अनुपालन के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई गई है। इसके लिए थानों के आधुनिकीकरण से लेकर जवानों के प्रशिक्षण व उन्हें नई तकनीक से सुसज्जित करने के निर्देश हैं। केंद्रीय योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2007-2008 में इस मद में पांच साल के लिए 210 करोड़ रुपये दिए भी गए थे। अब उम्मीद है कि इस राशि में गुणात्मक वृद्धि होगी।

पूरे देश के 14 हजार थानों में से 1300 थाने अभी इस योजना में शामिल है। संकेत हैं कि इस वर्ष देश के आधे थाने आधुनिकीकरण योजना में शामिल कर लिए जाएंगे। इसी तरह कानूनी सुधार की दिशा में भी क्रांतिकारी कदम उठाने की मंशा सरकार ने दिखाई है। मुकदमों को तेजी से निपटाने व रुकावटें पैदा करने की गुंजाइश खत्म करने के लिए दकियानूसी प्रक्रियाओं में सुधार एक बड़ा कदम होगा। इसी कड़ी में न्यायालयों में खाली पड़े जजों व अन्य पदों की भर्ती तेजी से होगी। साथ ही अदालतों को सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से हाईटेक कर प्रबंधन व निर्णय लेने में तेजी की कोशिश भी की जाएगी।