नई दिल्ली। सुरेश रैना और ईशांत शर्मा सहित भारत के सात खिलाड़ियों को इंग्लैंड की धरती पर अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का अनुभव नहीं है लेकिन कप्तान महेंद्र सिंह धौनी, सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग, सिक्सर किंग युवराज सिंह और तेज गेंदबाज जहीर खान को वहां की पिचें खूब रास आती हैं।
भारत ने न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के खिलाफ आईसीसी विश्व ट्वंटी 20 चैंपियनशिप के अभ्यास मैचों से पहले इंग्लैंड की धरती पर कोई ट्वंटी 20 मैच नहीं खेला था। रैना, ईशांत, रोहित शर्मा, प्रवीण कुमार, रविंदर जडेजा, यूसुफ पठान और प्रज्ञान ओझा तो पहली बार इंग्लैंड में अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे हैं लेकिन धौनी, सहवाग, युवराज, हरभजन सिंह और जहीर वहां की पिचों से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
धौनी ने इंग्लैंड में जो तीन टेस्ट मैच खेले हैं उनमें अपने बल्ले की छाप छोड़ी और 52.25 की औसत से 209 रन बनाए जबकि सात एक दिवसीय मैचों में उनके नाम पर 175 रन दर्ज हैं। सहवाग ने टेस्ट और एक दिवसीय दोनों में समान सफलता हासिल की है। इस आक्रामक सलामी बल्लेबाज ने इंग्लैंड में चार टेस्ट मैच में 39.50 की औसत से एक शतक सहित 237 रन और 12 एक दिवसीय मैच में चार अर्धशतक की मदद से 447 रन बनाए जिसमें उनका औसत 37.35 रहा। सहवाग विश्व चैंपियनशिप में यही प्रदर्शन दोहराकर आईपीएल में ढीले प्रदर्शन की यादों को मिटाना चाहेंगे।
युवराज को इंग्लैंड में केवल एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का अनुभव है और इनमें 2002 की नेटवेस्ट ट्राफी के फाइनल का मैच भी शामिल है जिसमें उन्होंने मोहम्मद कैफ के साथ मिलकर भारत को अप्रत्याशित जीत दिलाई थी। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने इंग्लैंड में जो 19 एक दिवसीय मैच खेले हैं उनमें 34.29 की औसत से 583 रन बनाए हैं। इसमें चार अर्धशतक शामिल हैं। भारत के इन तीन अनुभवी बल्लेबाजों के अलावा केवल गौतम गंभीर को ही इंग्लैंड की उछाल लेने वाली पिचों पर खेलने का अनुभव है। उन्होंने वहां अब तक जो चार एक दिवसीय मैच खेले हैं उनमें 28.25 की औसत से केवल 113 रन ही बनाए हैं। गंभीर आईपीएल में अपेक्षानुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए थे लेकिन टीम को उनसे शीर्ष क्रम में अच्छी शुरुआत की उम्मीद है।
यदि गेंदबाजों की बात की जाए तो जहीर को इंग्लैंड की पिचों से खास लगाव है। बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने वारेस्टरशर की तरफ से काउंटी मैचों में खेलकर ही भारतीय टीम में शानदार वापसी की थी। अंतरराष्ट्रीय मैचों में भी वह इंग्लैंड में सफल रहे हैं और 2007 के दौरे में भारत की जीत में उनकी अहम भूमिका रही थी। जहीर ने इंग्लैंड में जो सात टेस्ट मैच खेले हैं उनमें 29.27 की औसत से 29 विकेट हासिल किए। इनमें 2007 नाटिंघम टेस्ट में 134 रन देकर नौ विकेट लेने का मैच विजेता प्रदर्शन भी शामिल है। जहीर ने इसके अलावा 13 एक दिवसीय मैचों में 18 विकेट भी लिए हैं।
इंग्लैंड की पिचों को स्पिनरों के अनुकूल नहीं माना जाता है कि लेकिन हरभजन सिंह की ऑफ स्पिन ने वहां बल्लेबाजों पर अच्छा प्रभाव छोड़ा है। हरभजन को अंगरेजों की धरती पर केवल तीन टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला लेकिन इनमें वह 12 विकेट लेने में सफल रहे जिसमें एक बार पारी में पांच विकेट भी शािमल हैं। एक दिवसीय मैचों में तो हरभजन अधिक कारगर साबित हुए हैं। उनके नाम पर सात मैच में केवल 12 विकेट दर्ज हैं लेकिन उन्होंने वहां अधिकतर किफायती गेंदबाजी की है। श्रीलंका के खिलाफ ब्रिस्टल में 2002 में उन्होंने 46 रन देकर चार विकेट लिए थे जो उनका वहां सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी है।
भारतीय टीम के अन्य खिलाड़ियों में रुद्र प्रताप सिंह और इरफान पठान को ही इंग्लैंड की पिचों पर खेलने का अनुभव है। आरपी सिंह ने तीन टेस्ट में 12 विकेट और पांच एक दिवसीय मैच में सात विकेट लिए हैं जबकि आलराउंडर इरफान ने वहां केवल पांच एक दिवसीय मैच खेले हैं जिनमें उनके नाम पर तीन विकेट और 23 रन दर्ज हैं।