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प्रणब मुखर्जी बजट पर कामकाज शुरू कर किया

on मई 25,2009

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नई दिल्ली। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंत्रालय का कार्यभार संभालने से पहले ही बजट पर कामकाज शुरू कर दिया है। रविवार के दिन छुट्टी होने के बावजूद मुखर्जी ने अपने मंत्रालय के कुछ आला अधिकारियों की एक बैठक की। बजट तैयार करने का काम सोमवार से शुरू हो जाएगा।

इस दिन वित्त मंत्रालय का कार्यभार आधिकारिक तौर पर संभालने के तुरंत बाद मुखर्जी बजट की तैयारियों से जुड़े आला अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। वित्त मंत्री ने अपने अधिकारियों को संकेत दिए हैं कि वर्ष 2009-10 का आम बजट जुलाई के पहले पखवारे में पेश करने का लक्ष्य बनाया जाना चाहिए।

वित्त सचिव अशोक चावला और प्रमुख आर्थिक सलाहकार अरविंद विरमानी ने रविवार को प्रणब मुखर्जी से उनके आवास पर मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि यह बैठक दोनों अधिकारियों की तरफ से एक शिष्टाचार भेंट थी। मुखर्जी को मंत्रालय का आवंटन शनिवार को हुआ है और बहुत संभव है कि वे सोमवार को आधिकारिक तौर पर इसका कार्यभार संभाल लें। इसलिए वित्त सचिव और प्रमुख आर्थिक सलाहकार ने उनसे पहले मिलकर वित्तीय हालात की जानकारी दी है।

यह भी माना जा रहा है कि नए वित्त मंत्री को देश के मौजूदा आर्थिक हालात के बारे में भी मोटे तौर पर जानकारी दी गई है। सूत्रों के मुताबिक नए वित्त मंत्री के समक्ष वैसे तो आर्थिक मोर्चे पर कई चुनौतियां होंगी, लेकिन समय पर बजट पेश करना पहली अहम चुनौती है। लिहाजा मुखर्जी ने रविवार को ही वित्त मंत्रालय के दोनों शीर्षस्थ अधिकारियों को बजट की तैयारियों को लेकर लक्ष्य बना कर चलने की सलाह दी है।

मुखर्जी समय पर बजट पेश करने पर सबसे ज्यादा जोर दे रहे हैं। उन्होंने कहा भी था कि, अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता समाप्त करने के लिए समय पर बजट पेश करना जरूरी है। जानकारों का मानना है कि जुलाई, 2009 तक अगर पूर्ण बजट पेश नहीं हुआ तो मंदी के खिलाफ लड़ाई पर असर पड़ सकता है। अप्रैल, 2009 में आम चुनाव शुरू होने के चलते यूपीए सरकार ने लेखानुदान पेश किया था। इसके तहत केवल सरकारी व बेहद जरूरी खर्चो का आवंटन 31 जुलाई, 2009 तक के लिए किया गया था। अगर सरकार जुलाई में बजट पारित नहीं करवा पाती है तो एक और लेखानुदान पेश करने की स्थिति बन सकती है।

इसका सीधा मतलब यह हुआ कि सरकारी विभागों को विकास कार्यो पर खर्च करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलेगा। इससे मंदी दूर करने के सरकारी प्रयासों पर विपरीत असर पड़ेगा। यही कारण है कि नए वित्त मंत्री बजट तैयार करने पर खास जोर दे रहे हैं।


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