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अमेरिकी विरोधी भावना पाक सेना में

on मई 18,2009

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पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने सोमवार को स्वीकार किया कि पाक सेना के एक तबके और यहां तक कि जनता के मन में भी अमेरिका विरोधी भावना हो सकती है।

मुशर्रफ ने सीएनएन के साथ साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तानी जनता के मन में अमेरिका विरोधी भावना है और यह सेना के एक तबके में भी हो सकती है।

बुश प्रशासन के पूर्ण समर्थन से लगभग एक दशक तक पाकिस्तान पर शासन कर चुके मुशर्रफ ने कहा कि 1989 से लेकर 2001 तक के महत्वपूर्ण समय में अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया जिससे पाकिस्तानी लोगों के मन में अमेरिका की विश्वसनीयता के प्रति संदेह पैदा हो गया। उन्होंने कहा कि इन 12 सालों में पाकिस्तान को अकेला छोड़ दिया गया और अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ सामरिक भागीदारी छोड़ दी।

मुशर्रफ ने कहा, '42 साल तक [1947 से 1989 तक] हम अमेरिका के सामरिक भागीदार थे। विश्व में, हर चीज में, हम उसके साथ रहे, लेकिन बदले में हमें क्या मिला ? हमें छोड़ दिया गया। तो ऐसे में पाकिस्तान के लोग इस तरह की बात न सोचें तो क्या करें ?'

मुशर्रफ ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान को 10 अरब अमेरिकी डालर की मदद मिली और इसका अधिकांश हिस्सा बेकार चला गया। इसकी जगह उन्होंने दावा किया कि उन्हें लड़ाई के लिए पर्याप्त उपकरण नहीं मिले।

मुशर्रफ ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा उपलब्ध कराई गई सेवाओं के लिए 10 अरब अमेरिकी डालर की आधी राशि के रूप में पांच अरब अमेरिकी डालर उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि यह आपका धन नहीं है। यह हमारा धन है। इसलिए मुझे दोबारा कहने दीजिए कि पांच अरब डालर की राशि हमारा धन है। हमने आपको सेवाएं मुहैया कराईं। इसलिए आप हमें जवाब दे रहे हो।

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, 'स्वात घाटी और अन्य क्षेत्रों में स्थिति से और अधिक मजबूती से निपटा जाना चाहिए, क्योंकि हमने कुछ हासिल किया है। आपको सिर्फ दबाव बनाए रखना है।'



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