केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि उसकी राष्ट्रीय राजधानी के पास विवादास्पद सैनिक फार्म्स को नियमित करने की कोई योजना नहीं है और यह काम मास्टर प्लान 2021 के अधिसूचित करने के बाद ही किया जा सकता है। केंद्र सरकार के वकील ने बुधवार को न्यायमूर्ति एपी शाह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को बताया कि गत वर्ष 13 जून को सभी आपत्तियों के निराकरण के बाद मास्टर प्लान 2021 को अंतिम रुप दिया था। अब इसे अधिसूचित किया जाना है।
खंडपीठ ने इस दलील पर केंद्र और राज्य सरकारों को आठ अप्रैल तक मास्टर प्लान की यथास्थिति से कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश दिया। इस कालोनी में दिल्ली के समृद्ध एवं शक्तिशाली लोगों ने मकान बना रखे हैं और उन्हें उम्मीद है कि इसे नियमित कर दिया जाएगा।
दिल्ली सरकार के वकील ने खंडपीठ को बताया कि मास्टर प्लान 2021 का मसौदा तैयार कर लिया गया है और उसे मंजूरी मिलना बाकी है। मास्टर प्लान अधिसूचित किए जाने के बाद ही इन कालोनी की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
उधर केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि इन सैनिक फार्म्स को ऐसी श्रेणी में रखा गया जिसके तहत ऊंची दर पर उन्हें नियमित किया जा सकता है। इसके तहत जमीन की मौजूदा बाजार दर से 50 फीसदी अधिक कीमत तथा भवन नियमों के उल्लंघन का जुर्माना वसूला जा सकता है।
हालांकि जब पूछा गया कि ये सैनिक फार्म्स अधिकृत है या नहीं तब केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि फिलहाल यह अनाधिकृत कालोनी है।