काफी अर्से के बाद अर्थव्यवस्था के किसी मोर्चे से अच्छी खबर सुनने को मिली है। हालांकि यह खबर इतनी अच्छी नहीं है कि मान लिया जाए कि अर्थव्यवस्था पर छाए संकट के बादल छंटने लगे हैं। दरअसल, ढांचागत [इंफ्रास्ट्रक्चर] उद्योगों ने मार्च, 2009 में 2.9 फीसदी की वृद्धि हासिल की है जो फरवरी, 2009 में दर्ज 2.2 फीसदी से काफी बेहतर है। जनवरी, 2009 में छह प्रमुख ढांचागत उद्योगों में 1.4 फीसदी की वृद्धि हुई थी। उसके बाद से दो महीने तक लगातार इन उद्योगों के प्रदर्शन में सुधार को एक अच्छा संकेत माना जा रहा है। अगर पिछले वित्त वर्ष की बात करें तो कच्चे तेल, रिफाइनरी उत्पाद, कोयला, सीमेंट, बिजली और स्टील में संयुक्त तौर पर 2.7 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह वर्ष 2007-08 में दर्ज 5.9 फीसदी के मुकाबले आधे से भी कम है।
हालांकि अक्टूबर, 2008 में दर्ज 1.8 फीसदी की विकास दर के बाद मार्च, 2009 की वृद्धि दर्ज सबसे ज्यादा रही है। यह भी एक उत्साह का कारण है।
उत्साह की एक अन्य बड़ी वजह यह है कि मार्च में सीमेंट क्षेत्र में 10.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे साफ पता चलता है कि औद्योगिक मांग में सुधार हो रहा है। बिजली में भी इस महीने 5.9 फीसदी और कोयला उद्योग में 5.2 फीसदी की वृद्धि भी इस बात को बताती है कि कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिति पटरी पर लौट रही है। कच्चे तेल व स्टील में क्रमश: 2.3 और 2.6 फीसदी की गिरावट हुई है। रिफाइनरी उत्पादों में 3.3 फीसदी की वृद्धि दर भी काफी अच्छी कही जाएगी। इस तरह से मोटे तौर पर देखा जाए तो छह में से चार औद्योगिक क्षेत्रों की स्थिति पहले से सुधरी है।
अगर वर्ष 2008-09 की स्थिति देखें तो कच्चे तेल में 1.8 फीसदी की गिरावट हुई है जबकि रिफाइनरी उत्पादों में तीन फीसदी की वृद्धि हुई है। कोयला में 8.1 फीसदी, सीमेंट में 7.5 फीसदी और बिजली में 2.7 फीसदी की वृद्धि हुई है।