श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड जिद पर न अड़ता। काश.! भारतीय खुफिया एजेंसियों की सूचना को श्रीलंका सरकार ने हल्के में न लिया होता। पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के दावों पर भरोसा करने की भूल का खामियाजा श्रीलंका को ही नहीं, बल्कि पूरे क्रिकेट जगत को भुगतना पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान जाने के श्रीलंका टीम के फैसले पर स्पष्ट चेतावनी दी थी। न सिर्फ भारतीय, बल्कि कई अन्य देशों की खुफिया एजेंसियों ने भी पाकिस्तान में श्रीलंका की टीम पर हमले का खतरा जताया था। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने राकेट लांचर से लेकर आत्मघाती हमले तक की साजिश के बारे में आगाह किया था। इन सूचनाओं के आधार पर राजनयिकों ने श्रीलंका सरकार से आधिकारिक तौर पर बात भी की। भारतीय खुफिया एजेंसियों को सूचना थी कि किसी भी तरह पाकिस्तान में सरकार को अस्थिर करने में जुटा तंत्र किसी भी हद तक जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, उस समय श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने जिद पकड़ ली, जबकि कई खिलाड़ी भी पाकिस्तान नहीं जाना चाहते थे। श्रीलंका के राजनयिकों को भी लग रहा था कि यह सब भारत की पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने की मुहिम का एक हिस्सा है। इसलिए, भारतीय एजेंसियों की चेतावनी को उन्होंने नजरअंदाज कर दिया। इतना ही नहीं, क्रिकेटरों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान ने अपनी तरफ से जो इंतजाम किए, श्रीलंका ने उन्हीं पर भरोसा कर लिया। लिंट्टे से जूझ रही श्रीलंका सरकार ने सुरक्षा की समीक्षा के लिए पाकिस्तान में अपने अधिकारियों को भी भेजने की जहमत नहीं उठाई।
गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने पाकिस्तान के सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल भी उठाया। उन्होंने पाकिस्तान की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि खतरा भांपने में भूल हुई। खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए उपयुक्त इंतजाम नहीं किए गए थे।
खुफिया ब्यूरो यानी आईबी के सूत्रों के अनुसार, भारतीय क्रिकेट टीम का पाकिस्तान दौरा रद करने का फैसला तो मुंबई हमले के बाद हुआ, लेकिन असल में निशाने पर तो हमारे खिलाड़ी ही थे। खुफिया एजेंसियों को शक है कि भारत के प्रस्तावित पाकिस्तान दौरे के मद्देनजर, आतंकियों ने ये साजिश रची हो सकती है। चूंकि, भारतीय टीम का दौरा रद हो गया, लेकिन पहले से तैयार बैठे आतंकवादियों के निशाने पर श्रीलंका की टीम आ गई।