कोसी की बाढ़ ने जो दर्द दिया है उसे दूर होने में भले ही समय लगे, लेकिन कई हितकारी परिवर्तन भी देखने को मिले हैं। विलुप्त हो रहे गिद्धों के झुंड के अलावा कई इलाकों के भूमिगत जल में भी अंतर आया है। साथ ही अररिया जिले की नदी में एक नई प्रजाति की मछली भी आ गई है। जो खाने में बेहद स्वादिष्ट बताई जाती है।
जानकारों की मानें तो कोसी की बाढ़ का पानी उतरने के बाद अररिया व आसपास के क्षेत्रों के पर्यावरण में कई परिवर्तन देखे जा रहे है। खेतों में सिल्ट डिपाजिट, नई धाराओं का निर्माण, पेड़ों का सूख जाना और कई विषैले जीवों का आगमन तो सदियों से कोसी की बाढ़ के सामान्य कारण रहे है। लेकिन इस बार एक असामान्य बात यह है कि विलुप्त हो रहे गिद्धों के समूह अररिया जिले के नरपतगंज व अन्य इलाकों में देखे जा रहे है। कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग के कारण गिद्धों में ड्रापिंग हेड सिंड्राम [डीएचएस] नामक बीमारी फैल गई थी। इससे इलाके के सारे गिद्ध चले गए थे। अब कोसी का पानी उतरने के बाद झुंड देखे जाने से पर्यावरण प्रेमी खुश हैं। हालांकि अब तक वैज्ञानिक तौर पर इन नवागत पक्षियों का अध्ययन नहीं हो पाया है।
वहीं, कोसी की बाढ़ के बाद इलाके के पेयजल में भी परिवर्तन की बात लोग बता रहे है। नरपतगंज व अगल-बगल के गांवों में पीने का पानी अत्यधिक लौहयुक्त व बेस्वाद था। लेकिन अब नरपतगंज बाजार के लोगों ने स्वाद बदलने की पुष्टि की है। बाढ़ के बाद इस जिले की नदियों में एक खास मछली भी आ गई है। यह है जल कपूर मछली। मछुआरों ने बताया कि जब से कोसी की बाढ़ आई, तभी से यह खास मछली सुरसर नदी में देखी जा रही है। जल कपूर मछली को बेहद स्वादिष्ट माना जाता है।