Today is पेहला पन्ना | घरपृष्ठ निर्धारित करना | पसंदीदा मे जमा कर
वेबसाईट खोजे   प्रगतिशील खोज »
संपादक
Harish Lamba
(Editor and Chief)

ख़बरों में है दम, सबसे आगे हम
पुराख़बर
Mo Tu We Th Fr Sa Su
12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
272829

न्यूज़पत्र
न्यूज़पत्र सबस्क्राईब करें:

Poll: आपके विचार
आप हमारी वेबसाइट के बारे में क्या सोचते हैं
यह वेबसाइट बड़िया है
कुछ ख़ास नही
थोड़े और काम की ज़रूरत है
बिल्कुल बड़िया नही
Poll परिणाम | पुरानी polls


email दोस्त को ई-मेल करें | print विवरण छापें |

विलुप्त होते गिद्धों को कोसी ने लौटाया

on मार्च 02,2009

image

 

कोसी की बाढ़ ने जो दर्द दिया है उसे दूर होने में भले ही समय लगे, लेकिन कई हितकारी परिवर्तन भी देखने को मिले हैं। विलुप्त हो रहे गिद्धों के झुंड के अलावा कई इलाकों के भूमिगत जल में भी अंतर आया है। साथ ही अररिया जिले की नदी में एक नई प्रजाति की मछली भी आ गई है। जो खाने में बेहद स्वादिष्ट बताई जाती है।

जानकारों की मानें तो कोसी की बाढ़ का पानी उतरने के बाद अररिया व आसपास के क्षेत्रों के पर्यावरण में कई परिवर्तन देखे जा रहे है। खेतों में सिल्ट डिपाजिट, नई धाराओं का निर्माण, पेड़ों का सूख जाना और कई विषैले जीवों का आगमन तो सदियों से कोसी की बाढ़ के सामान्य कारण रहे है। लेकिन इस बार एक असामान्य बात यह है कि विलुप्त हो रहे गिद्धों के समूह अररिया जिले के नरपतगंज व अन्य इलाकों में देखे जा रहे है। कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग के कारण गिद्धों में ड्रापिंग हेड सिंड्राम [डीएचएस] नामक बीमारी फैल गई थी। इससे इलाके के सारे गिद्ध चले गए थे। अब कोसी का पानी उतरने के बाद झुंड देखे जाने से पर्यावरण प्रेमी खुश हैं। हालांकि अब तक वैज्ञानिक तौर पर इन नवागत पक्षियों का अध्ययन नहीं हो पाया है।

वहीं, कोसी की बाढ़ के बाद इलाके के पेयजल में भी परिवर्तन की बात लोग बता रहे है। नरपतगंज व अगल-बगल के गांवों में पीने का पानी अत्यधिक लौहयुक्त व बेस्वाद था। लेकिन अब नरपतगंज बाजार के लोगों ने स्वाद बदलने की पुष्टि की है। बाढ़ के बाद इस जिले की नदियों में एक खास मछली भी आ गई है। यह है जल कपूर मछली। मछुआरों ने बताया कि जब से कोसी की बाढ़ आई, तभी से यह खास मछली सुरसर नदी में देखी जा रही है। जल कपूर मछली को बेहद स्वादिष्ट माना जाता है।


554 बार पड़ी गई

Breaking News
ख़ास ख़बर
hit counters