नई दिल्ली/लंदन। अंडमान निकोबार की एक संरक्षित जनजाति जारवा के लोगों को भोजन के बदले नचवाने से संबंधित दो नए वीडियो फिर सामने आए हैं। ब्रिटेन के समाचार पत्र आब्जर्वर ने दावा किया है कि यह वीडियो उसके पास हैं। इस मामले में एक बार फिर स्थानीय पुलिस की मिलीभगत सामने आई है।
मोबाइल फोन से लिए गए तीन मिनट 19 सेकेंड के वीडियो क्लिप में जारवा जनजाति की अर्द्धनग्न महिलाओं को एक भारतीय पुलिस अधिकारी के समक्ष नाचते हुए दिखाया गया है। एक अन्य क्लिप में अर्द्धनग्न महिला के चारों और सेना की वर्दी पहने व्यक्ति को घूमते हुए दिखाया गया है।
इससे पहले भी 'आब्जर्वर' ने पर्यटकों के सामने जारवा जनजाति की अर्द्धनग्न महिलाओं के नृत्य से जुड़ी खबर और वेबसाइट पर एक वीडियो अपलोड किया था। जिसके बाद केंद्र सरकार ने अंडमान प्रशासन को इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। विवादित वीडियो में एक ट्रैवल एजेंट और ब्रिटिश पत्रकार के बीच बातचीत भी दिखाई गई थी। गृह मंत्रालय के कड़े रुख के बाद इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। आदिवासी जनजाति अधिनियम [पैट] के तहत आदिवासियों की तस्वीरें खींचना और उनका वीडियो बनाना प्रतिबंधित है। इस संरक्षित जनजाति के केवल 403 लोग ही जीवित बचे हैं, जो दक्षिण अंडमान के सुरक्षित जंगलों में रहते हैं। ये लोग बाहरी व्यक्तियों से घुलते-मिलते नहीं हैं।
नया नहीं है वीडियो
नई दिल्ली। अंडमान के जारवा जनजाति की अर्द्धनग्न महिलाओं के नृत्य संबंधी वीडियो फुटेज की जांच में पता चला है कि यह करीब साढ़े तीन वर्ष पुराना है।
अंडमान निकोबार द्वीप समूह प्रशासन द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट में इन दावों को खारिज किया गया है कि जारवा जनजाति की महिलाओं का नृत्य संबंधी वीडियो हाल में बनाया गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामेश्वर उरांव ने बताया कि अंडमान में आदिवासी कल्याण विभाग के सहायक निदेशक ने जांच पूरी होने की बात कही है। इसमें यह बात सामने आई है कि वीडियो साढ़े तीन वर्ष पुराना है।
पिछले महीने इस वीडियो फुटेज के सामने आने के बाद आयोग ने अंडमान प्रशासन को मामले की जांच करने और जल्द रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। यह रिपोर्ट शीघ्र ही आयोग के पास भेजी जाएगी। उरांव ने कहा कि अंडमान के अधिकारियों ने उन्हें बताया है कि अब पर्यटकों के अंडमान ट्रंक मार्ग पर उतरने और वहां वीडियो बनाने या फोटो लेने पर रोक का कड़ाई से पालन किया जा रहा है।
जारवा का टीकाकरण जरूरी
केंद्र सरकार ने अंडमान निकोबार की जारवा जनजाति को बीमारियों और आनुवांशिक विकृतियों से बचाने के लिए उनके टीकाकरण पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि इस जनजाति की संख्या को और कम होने से बचाने के लिए यह जरूरी है। केंद्रीय
जनजातीय व पंचायती राज मंत्री वी किशोर चंद्रदेव ने कहा,'जारवा का टीकाकरण किए जाने की जरूरत है। चिकित्सा विशेषज्ञों और मानव विज्ञानियों को अध्ययन कर हमें यह बताना होगा कि यह जनजाति कैसे रहती है और इसकेलिए क्या किए जाने की जरूरत है।'
जनजाति आयोग जारी करेगा नोटिस
नई दिल्ली। संरक्षित जारवा आदिवासियों से जुड़े नए वीडियो फुटेज में पुलिस अधिकारियों के दिखाई देने को अनुसूचित जनजाति आयोग ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में आयोग अब अंडमान निकोबार प्रशासन को नोटिस जारी करेगा। आयोग के अनुसार, नए वीडियो ने जारवा प्रकरण में स्थानीय पुलिस की मिलीभगत को पूरी तरह से उजागर करके रख दिया है।
आयोग के अध्यक्ष रामेश्वर ओरांव ने कहा, 'नए वीडियो फुटेज में एक पुलिस अधिकारी की आवाज साफ सुनी जा सकती है और यह गंभीर मामला है।' उन्होंने कहा कि आयोग इसे गंभीरता से लेगा और सोमवार को इस संबंध में अंडमान निकोबार प्रशासन को नोटिस जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर इस प्रकरण में पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं तो अपराध और गंभीर हो जाता है।