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गुजरात में गोधरा कांड के बाद के दंगों की जांच

on मार्च 02,2009

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गुजरात में गोधरा कांड के बाद के दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल [एसआईटी] ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट शीर्ष न्यायालय में दाखिल कर दी।

केंद्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक आर के राघवन के नेतृत्व वाले एसआईटी ने बंद लिफाफे में गोपनीय रिपोर्ट न्यायमूर्ति अरिजित पसायत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश की।

पीठ ने कहा कि मुख्य रिपोर्ट सिर्फ गुजरात सरकार और अदालत के मददगार के तौर पर कार्य कर रहे अधिवक्ता हरीश साल्वे को दी जाएगी। अदालत ने इसके बारे में चार सप्ताह के भीतर उन्हें अपने सुझाव दाखिल करने को कहा है। अदालत ने हालांकि कहा कि गोपनीय रिपोर्ट किसी को भी नहीं दी जाएगी।

अदालत ने कहा कि सीबीआई के पूर्व प्रमुख, उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक सीडी सतपथी और गुजरात के तीन आईपीएस अधिकारियों गीता जौहरी, शिवानंद झा तथा आशीष भाटिया की सदस्यता वाला एसआईटी काम करना जारी रखेगा और वह यदि चाहता है तो किसी भी अन्य मामले की जांच करने की उसे आजादी होगी। अदालत ने मामले की आगे सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख तय की है।

शीर्ष न्यायालय ने गोधरा कांड के बाद से जुड़े 14 मामलों की जांच पड़ताल के लिए पिछले साल 26 मार्च को पांच सदस्यीय जांच दल [एसआईटी] का गठन किया था।

अदालत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, व्यक्तियों और गैर सरकारी संगठनों की ओर से दाखिल कई याचिकाओं पर यह निर्देश दिया था जिनमें दंगा मामलों का मुकदमा गुजरात के बाहर हस्तांतरित करने और सीबीआई से इसकी जांच या पुनर्जांच कराने की मांग की गई थी। याचिकाएं तब दाखिल की गई थीं जब जांच को पटरी से उतारने के लिए धमकी, दबाव और लालच के आरोपों के बीच कई गवाह अपने बयान से पलट गए थे।

एनएचआरसी ने मामले और मुकदमें के हस्तांतरण की इस आशंका के साथ मांग की थी कि यह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से नहीं चलेगा।


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