पुणे। पुणे में बुधवार को राज्य परिवहन निगम की बस से कुचलकर आठ लोगों की जान लेने वाले और 27 अन्य को घायल करने वाले बस चालक संतोष माने को गुरुवार को एक स्थानीय अदालत ने तीन फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया और वकीलों ने उसकी ओर से पेश होने से इनकार कर दिया।
माने को न्यायिक मजिस्ट्रेट वी बी वोहरा की अदालत में पेश किया गया। उसके चेहरे पर अफसोस का कोई भाव नहीं था। उस पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के साथ साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 [हत्या], 307 [हत्या का प्रयास], 326 [जान बूझकर घातक रूप से चोटिल करना], 324 [जान बूझकर चोटिल करना] और 381 [चोरी] का आरोप लगाया गया है।
सरकारी वकील उज्वला पवार ने माने को 14 दिनों तक की पुलिस हिरासत में भेजने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी ने घृणित अपराध किया है तथा यह जरूरी हो गया है कि इस आपराधिक कृत्य से पहले राज्य परिवहन विभाग में उसके व्यवहार की जांच की जाए।
पवार ने कहा कि पुलिस को मामले में आवश्यक फारेंसिक साक्ष्य एकत्र करने के लिए समय की जरूरत पड़ेगी।
बहरहाल, मजिस्ट्रेट वोहरा ने आरोपी को तीन फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेजा। अदालती कार्यवाही के दौरान आरोपी भावहीन चेहरे के साथ अदालत में खड़ा था।
पुणे बार एसोसिएशन के अपील जारी किए जाने के कारण माने की ओर से कोई वकील अदालत में पेश नहीं हुआ।
माने ने बुधवार सुबह एक खाली बस को चुराने के बाद पुणे की भीड़भरी सड़क पर उसे अंधाधुंध चलाना शुरू कर दिया और जो भी वाहन उसके रास्ते में आया, उसे कुचल दिया।
तीस वर्षीय चालक महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम के स्वारगेट डिपो से संबद्ध था। हादसे के बाद करीब 30 मिनट तक पीछा करने के बाद उसे शहर के निलयम थिएटर के समीप पकड़ा गया।
उसके परिवार ने कहा है कि वह मानसिक रूप से परेशान है तथा उसकी इस हरकत के पीछे यही वजह हो सकती है।