ढाका। बगावत भड़कने के तुरंत बाद बांग्लादेश की सेना बांग्लादेश राइफल्स [बीडीआर] के मुख्यालय में प्रवेश करने को तैयार थी, लेकिन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने उसे ऐसा करने से रोका और ऐन वक्त पर मसले को सियासी तौर पर सुलझाने की सलाह दी।
सैन्य खुफिया विभाग के निदेशक ब्रिगेडियर जनरल महमूद हुसैन ने शनिवार रात यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री ने निर्देश दिए थे कि संकट से राजनीतिक तौर पर निपटा जाए और इसे इसी तरीके से सुलझाया जाए। उन्होंने कहा कि सेना बीडीआर में गत बुधवार बगावत शुरू होने के तुरंत बाद उससे निपटने को तैयार थी, लेकिन उसने हसीना के मसले को राजनीतिक तौर पर सुलझाने के फैसले का समर्थन किया।
अर्द्धसैनिक बल बांग्लादेश राइफल्स के विद्रोही सैनिकों की दो दिन की हिंसक बगावत में सेना के कम से कम 73 अधिकारी और चार नागरिक मारे गए। ब्रिगेडियर हुसैन ने इसे 'बांग्लादेश के इतिहास में सेना के अधिकारियों का संभवत: सबसे बदतर संहार' करार देते हुए कहा कि सशस्त्र बलों में गुस्सा 'काफी स्वाभाविक' है।
उन्होंने कहा कि हालांकि, सेना एक अनुशासित बल है जो अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रख सकती है। यह पूछने पर कि क्या सेना के जवाबी कार्रवाई करने पर अधिक हिंसा नहीं होती, संवाददाता सम्मेलन में मौजूद सेना के चिकित्सक कर्नल अब्दुल सलाम ने कहा कि यह एक मुश्किल सवाल है, लेकिन सेना की ओर से बरता गया संयम अच्छी बात है। बीडीआर के सैनिकों की बगावत में अपने अधिकारियों की हत्या से नाराज बांग्लादेश की सेना ने इस संहार में संलिप्त लोगों को 'अधिकतम' सजा देने की मांग की है।
ब्रिगेडियर हुसैन ने कहा कि दोषियों को उदाहरण पेश करने वाली सजा देने से हमारी भावनाएं शांत होंगी। हमारी मांग यह है कि हत्याओं की जांच तेज की जाए और जिम्मेदार लोगों को अधिकतम सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की गठित समिति के जांच का आदेश देने के बावजूद सेना ने विद्रोह के दौरान अपने अधिकारियों की हत्या पर खुद की जांच भी शुरू कर दी है।