नई दिल्ली। अपने साथियों के लिए वीवीएस लक्ष्मण बल्ले के साथ कलाकार है जबकि आस्ट्रेलियाई टीम के लिए वह दु:स्वप्न हैं।
लक्ष्मण की 2001 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता में दूसरे टेस्ट मैच में खेली गई 281 रन की पारी ने टेस्ट क्रिकेट की काफी धारणाएं बदली लेकिन स्वयं इस कलात्मक बल्लेबाज का मानना है कि इस एक पारी ने टीम में विषम क्षणों में भी वापसी करने का विश्वास भरा। बचपन में चिकित्सक बनने का सपना पालने वाले इस स्टार बल्लेबाज ने 2001 की अपनी उस पारी को याद करते हुए कहा, 'सभी यह मान रहे थे कि फालोआन के बाद हमारी हार होगी लेकिन राहुल द्रविड़ और मैंने चौथे दिन साझेदारी निभाई और वहां से फिर काफी बदलाव हो गया।' उन्होंने कहा, 'उस मैच के बाद हम सभी में यह विश्वास भर गया कि हम चाहे कैसी भी स्थिति में हों हम उससे बाहर निकलकर उसे अपने पक्ष में मोड़ सकते हैं। उस टेस्ट मैच ने टीम में आत्मविश्वास जगाया।'
भारत की तरफ से 100 टेस्ट मैच खेलने वाले सातवें बल्लेबाज लक्ष्मण के कैरियर के लिए यह पारी जहां टर्निग प्वाइंट साबित हुई वहीं समय-समय पर टीम से बाहर किए जाने से इस क्रिकेट कलाकार का दिल भी टूटा। लक्ष्मण ने एक कार्यक्रम में कहा, 'परेशानी यह थी कि मुझे पारी का आगाज करने के लिए कहा गया और जब मैं असफल रहता तो मुझे बाहर कर दिया जाता। इससे वास्तव में मुझे दुख हुआ लेकिन 1996 से 2000 के बीच का समय मेरे लिए मुश्किल भरा था।'
लक्ष्मण ने उस समय की भी बात की जब उन्हें यह चयन करना था कि वह क्रिकेटर बनना चाहते हैं या चिकित्सक। उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा अपने माता-पिता की तरह चिकित्सक बनना चाहता था। जब मैं 11वीं कक्षा में गया तो मैंने चिकित्सा विज्ञान लिया और अपने पिताजी की तरह इसी पेशे में जाना चाहता था। मेरे पिताजी हमेशा मेरे रोल माडल रहे।' लेकिन उन्होंने दूसरा कैरियर ही अपनाया। लक्ष्मण के पिता डा. शांताराम ने कहा, 'उसने दसवीं में विज्ञान में 100 में से 98 अंक हासिल किए और वह असमंजस में था कि देश की सेवा बल्ले से करे या अपने माता-पिता की तरह स्टेथस्कोप से। उसने फैसला करने में समय लिया और इसके बाद वह मेरे पास आया और कहा कि वह बल्ले से देश की सेवा करना चाहता है।'
लक्ष्मण ने इस बारे में कहा, 'एक बार जब मैंने क्रिकेट के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया तो मैंने राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के लिए खुद को पांच साल [17 से 22 वर्ष के बीच] का समय दिया। यदि ऐसा नहीं होता तो फिर मैं चिकित्सा क्षेत्र में चला जाता और चिकित्सक बनता। इसलिए 17 वर्ष से मैंने वास्तव में पूरा ध्यान क्रिकेट पर लगाया और उसे अपनी जिंदगी बना दिया।' लक्ष्मण तब 22 साल के थे जब उन्हें 1996 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिला। उन्होंने पहली पारी में 11 रन बनाए लेकिन दूसरी में अर्धशतक जमाया।