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भारत ने कोलंबो से कहा कि उसे लिट्टे के संघर्षविराम की पेशकश को मान लेना चाहिए

on मार्च 01,2009

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नई दिल्ली। श्रीलंका में गहराते मानवीय संकट को देखते हुए भारत ने शनिवार को कोलंबो से कहा कि उसे लिट्टे के संघर्षविराम की पेशकश को मान लेना चाहिए ताकि फंसे नागरिकों को सुरक्षित रास्ता मिल सके।

विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारत उत्तरी श्रीलंका में विस्थापितों की सहायता के लिए आपातकालीन चिकित्सा ईकाई और दवा भेजने का प्रबंध कर रहा है।

मुखर्जी ने एक बयान में कहा कि भारत सरकार श्रीलंका में मानवीय संकट को गंभीर मानती है जो दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। संघर्ष क्षेत्र में 70 हजार नागरिकों के फंसे होने की रिपोर्ट को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भोजन, पानी और दवाओं की कमी है और संघर्ष क्षेत्र में कई निर्दोष लोगों को जान गंवानी पड़ी है।

मुखर्जी ने कहा कि खबर मिली है कि लिट्टे ने संघर्षविराम की पेशकश की है। बहरहाल इसमें हथियार डालने की इच्छा नहीं जताई गई है, लेकिन हमारा विचार है कि शत्रुता को रोकने के लिए श्रीलंका की सरकार को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसलिए भारत सरकार श्रीलंका की सरकार से अपील करती है कि वह फंसे नागरिकों को तुरंत सुरक्षित निकालने पर काम करे।

विदेश मंत्री ने कहा कि मुझे विश्वास है कि श्रीलंका की सरकार और अन्य सभी लोग इस अपील पर विचार करेंगे जो श्रीलंका के सभी क्षेत्रों के लोगों के हित में है। उन्होंने कहा कि शत्रुता पर विराम का उपयोग तमिल लोगों को युद्ध ग्रस्त क्षेत्र से हटाकर सुरक्षित स्थानों की ओर ले जाने के लिए किया जाना चाहिए।

मुखर्जी ने कहा कि सुरक्षित स्थान पर उपयुक्त पुनर्वास और अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों की उपस्थिति होनी चाहिए और वहां अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास की भी बिना रोकटोक पहुंच होनी चाहिए।


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