पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को संवेदनशील सूचनाएं मुहैया कराने के आरोप में गिरफ्तार राजनयिक माधुरी गुप्ता के उस आवदेन पर दिल्ली की एक अदालत ने कोई आदेश देने से सोमवार को इंकार कर दिया जिसमें उन्होंने जेल अधिकारियों पर परेशान करने का आरोप लगाया है। मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कावेरी बावेजा ने माधुरी के आवेदन को खारिज कर दिया। इसके पहले जेल अधिकारियों ने दावा किया कि वे परेशान करने वाली किसी गतिविधि में शामिल नहीं रहे हैं और उनके वार्ड में सामान्य तलाशी ली गई है।
जेल अधीक्षक ने कहा कि हम नियमित रूप से वार्ड की तलाशी लेते हैं जहां अधिकारी बंद हैं। जेल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक के लिए गृह मंत्रालय और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक तलाशी अभियान चलाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि सख्त निगरानी और सतर्कता के बावजूद कुछ कैदी जेल के अंदर मोबाइल फोन प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि 30 जून को हुई तलाशी जेल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए थी।
इसके पहले माधुरी की ओर से पेश वकील जोगिंदर दहिया ने आरोप लगाया कि जेलकर्मी उन्हें परेशान कर रहे हैं और फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी दे रहे हैं।
दहिया ने कहा कि वह जेल अधिकारियों के रुख को देखते हुए वह आरोपों पर जोर नहीं दे रहे हैं। इसके बाद अदालत ने माधुरी के आवेदन का निबटारा कर दिया। महिला अधिकारी के आवेदन पर अदालत ने नौ जुलाई को जेल अधिकारियों से जवाब मांगा था।
दिल्ली पुलिस ने माधुरी को 22 अपै्रल को गिरफ्तार किया था। माधुरी इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के प्रेस एवं सूचना प्रकोष्ठ में द्वितीय सचिव के रूप में नियुक्त थी।
दिल्ली पुलिस इस मामले में 20 जुलाई के बाद उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर सकती है। माधुरी 20 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में हैं और सरकारी गोपनीयता कानून के तहत आरोपों का सामना कर रही हैं।