नक्सलवाद को लेकर चौतरफा घिरी सरकार अब समेकित कार्य योजना में राज्य सरकारों के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठनों को भी साथ लेकर चलना चाहती है। लिहाजा दो दिन बाद होने वाली प्रधानमंत्री और नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक से पूर्व सोमवार को योजना आयोग ने पूरे मुद्दे पर गैर-सरकारी संगठनों [एनजीओ] के सदस्यों के साथ चर्चा की। केंद्रीय योजनाओं में भी नजरअंदाज रहीं ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों को अब केंद्रीय भूमिका में लाने की कोशिश होगी। गौरतलब है कि योजना आयोग ने नक्सल प्रभावित 35 जिलों के लिए 13,399 करोड़ रुपये का एक्शन प्लान तैयार किया है। इसके जरिए इन जिलों में विशेष विकास योजनाएं चलाई जानी है। सरकार चाहती है कि इस बार योजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर कोई सवाल न उठे। लिहाजा हर स्तर पर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित किए जाने का प्रयास हो रहा है। सोमवार को आयोग के सदस्य मिहिर शाह ने एनजीओ के साथ कार्यान्वयन के तौर तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने एनजीओ से सरकार की मंशा जता दी कि कुछ भी ऊपर से थोपे जाने जैसा नहीं होना चाहिए। विकास योजनाओं में ग्राम सभा के स्तर से कार्यान्वयन होना चाहिए ताकि उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो।