पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सोमवार को कहा कि देश के अल्पसंख्यक समुदाय को अपने भीतर, 'अल्पसंख्यक' होने और समाज में कमजोर होने की भावना मन में घर नहीं करनी देने चाहिए बल्कि कामयाबी के लिए रचानात्मक नेतृत्व पैदा करना चाहिए। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के एक कार्यक्रम में कलाम ने कहा कि अल्पसंख्यकों को खुद को कमजोर नहीं सोचना चाहिए। उन्होंने गरीब और दबे कुचले वर्ग से ताल्लुक रखने वाले समद नाम के व्यक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने बैंक की आर्थिक सहायता से खुद का उद्योग लगाया। उहोंने बताया कि समद का कारोबार आज 10 करोड़ रुपये को पार कर गया है और इससे करीब 200 परिवार प्रत्यक्ष रूप से लाभावान्वित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए जरूरी है कि वे अपने अंदर रचनात्मक नेतृत्व पैदा करें। यह नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो परंपरागत कमांडर की भूमिका से कोच के रूप में खुद को बदले। कलाम ने कहा कि जिस समाज में जितने ज्यादा रचनात्मक नेता होंगे वह समाज उतना ज्यादा विकास करेगा।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि देश भर में ऐसे उद्योग स्थापित करने की जरूरत है और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आयोग की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि वह स्वयं में कुछ सुधार लाकर अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग की वेबसाइट पर उसके लक्ष्यों के बारे में स्पष्ट रूप से जानकारी दी जानी चाहिए। वेबसाइट को सरकार के अन्य मंत्रालयों की वेबसाइट से जोड़ा जाना चाहिए। वेबसाइट को लगातार अद्यतन किया जाना चाहिए ताकि लोगों को आयोग की गतिविधियों नवीनतम जानकारियां मिल सके। कलाम ने कहा कि आयोग को सभी अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक और रोजगारपरक योग्यता तथा आर्थिक स्थिति के विषय में अध्ययन भी कराना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि आयोग को सामाजिक और आर्थिक मानकों का परीक्षण करना चाहिए और रोजगार सृजित करने के लिए रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, विश्वसनीय उूर्जा प्रणाली और जटिल तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के पांच क्षेत्रों में एकीकृत पहल की जरूरत है।