Today is पेहला पन्ना | घरपृष्ठ निर्धारित करना | पसंदीदा मे जमा कर
वेबसाईट खोजे   प्रगतिशील खोज »
संपादक
Harish Lamba
(Editor and Chief)

ख़बरों में है दम, सबसे आगे हम
पुराख़बर
Mo Tu We Th Fr Sa Su
12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
272829

न्यूज़पत्र
न्यूज़पत्र सबस्क्राईब करें:

Poll: आपके विचार
आप हमारी वेबसाइट के बारे में क्या सोचते हैं
यह वेबसाइट बड़िया है
कुछ ख़ास नही
थोड़े और काम की ज़रूरत है
बिल्कुल बड़िया नही
Poll परिणाम | पुरानी polls


email दोस्त को ई-मेल करें | print विवरण छापें |

वजन घटेगा पवार का

on जुलाई 06,2010

image
 केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन [संप्रग] सरकार के वजनदार मंत्री शरद पवार का वजन [सरकारी कामकाज से संबंधित] कम करने का सरकार को मौका मिल गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी [राकांपा] के मुखिया पवार ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद [आईसीसी] के अध्यक्ष का पद संभालने के बाद खुद प्रधानमंत्री से जिम्मेदारियां कम करने का आग्रह किया है। इसके बाद संभावना है कि पवार से खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली मंत्रालय वापस लिया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा बिल के झमेले से बचने के लिए खुद पवार भी इस मंत्रालय से मुक्ति चाहते हैं।

केंद्रीय कृषि, खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्री शरद पवार ने सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर मंत्रालयों के कामकाज का बोझ घटाने का आग्रह किया। पवार ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा 'मैंने उनसे [प्रधानमंत्री से] अपना बोझ घटाने का आग्रह किया।' जिम्मेदारियां घटाने की वजह पूछने पर 70 वर्षीय शरद भावुक हो उठे और कहा '44 साल का संसदीय जीवन रहा, जिनमें 25-26 साल सरकार में रहा। अब मुझे राहत चाहिए। इसका उपयोग मैं अपनी पार्टी और आईसीसी से जुड़ी जिम्मेदारियों में करना चाहूंगा।' पवार के पास इस समय तीन मंत्रालय-उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कृषि हैं। संभावना है कि सरकार पवार के आग्रह के मद्देनजर उनसे खाद्य व सार्वजनिक वितरण प्रणाली मंत्रालय वापस ले सकती है।

गौरतलब है कि सरकार काफी समय से पवार से खाद्य मंत्रालय को वापस लेने की इच्छा रखती है। इसकी वजह यह है कि महंगाई से संबंधित पवार के बयानों ने कई बार सरकार की किरकिरी कराई है। क्रिकेट के क्षेत्र में पवार की सक्रियता के कारण भी केंद्र सरकार को अपने दोनों कार्यकाल में कई बार असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। आईपीएल विवाद में पवार और उनके परिवार का नाम उछलना इस सिलसिले में सबसे अहम रहा। वैसे, सूत्रों की मानें तो पवार खुद भी खाद्य मंत्रालय से मुक्ति चाहते हैं। इसकी वजह है खाद्य सुरक्षा बिल। सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद से इस बिल के मसौदे में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को हर माह 35 किलो अनाज देने का प्रावधान फिर शामिल करने का फैसला किया है। पवार इससे सहमत नहीं हैं क्योंकि उनके मुताबिक, इतनी बड़ी मात्रा में अनाज देश में मौजूद नहीं है।

पवार के नजदीकी सूत्रों के अनुसार खाद्य सुरक्षा बिल आगे चलकर सरकार के गले की फांस बन सकता है। लिहाजा, पवार इस झमेले को कांग्रेस को सौंप देना चाहते हैं ताकि भविष्य में उन अंगुली न उठे। काबिले गौर यह भी है कि आईसीसी अध्यक्ष की कुर्सी संभालते ही यह सवाल उठा था कि पवार इस पद के दायित्वों के साथ न्याय कैसे कर पाएंगे। खासतौर पर तब जबकि उनके पास भारत सरकार के तीन अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। इसके बाद पवार ने खुद कहा था कि वे प्रधानमंत्री से सरकारी कामकाज का बोझ कम करने का आग्रह करेंगे। बताते चलें कि पवार के पास इस समय तीन मंत्रालयों का कामकाज संभालने में सहयोग के लिए सिर्फ एक ही राज्य मंत्री- के.वी. थॉमस हैं। जबकि पिछली सरकार में उनके पास इन्हीं तीन मंत्रालयों के लिए तीन राज्य मंत्री थे।



101 बार पड़ी गई

Breaking News
ख़ास ख़बर
hit counters