अंबानी बंधु में सुलह समझौते के बाद अनिल अंबानी समूह [एडीएजी] ने बड़ा कदम उठाया है। इस के तहत रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड [आरएनआरएल] का अब समूह की अन्य कंपनी रिलायंस पावर में विलय हो जाएगा। समूह ने शुक्रवार को इस विलय का ऐलान कर दिया गया। विलय के बाद बनने वाली कंपनी का बाजार पूंजीकरण 51 हजार करोड़ रुपये होगा। रिलायंस पावर [आरपावर] और आरएनआरएल के बोर्ड इस विलय प्रस्ताव पर विचार के लिए रविवार यानी 4 जुलाई को अलग-अलग बैठक कर रहे हैं। हालांकि दोनों ही कंपनियों ने प्रस्तावित विलय के बारे में कोई ब्यौरा नहीं दिया, लेकिन यह विलय शेयरों की अदला-बदली के जरिए होने की संभावना है। ब्रोकरों की मानें तो आरएनआरएल के प्रत्येक 4 शेयरों पर आरपावर का एक शेयर दिया जाएगा।
आरएनआरएल की कैफियत
आरआईएल के साथ गैस विवाद में सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा हारने के बाद एक अलग कंपनी के तौर पर आरएनआरएल अपनी अहमियत गंवा चुकी है। पांच साल पहले यानी जून, 2005 में धीरूभाई अंबानी के रिलायंस समूह के विभाजन से आरएनआरएल अस्तित्व में आई थी। बंटवारे की योजना के मुताबिक आरएनआरएल को मुकेश की रिलायंस इंडस्ट्रीज [आरआईएल] से गैस खरीदकर इसे एडीएजी के पावर प्लांटों को बेचना था। उसे यह गैस उत्तर प्रदेश के दादरी में रिलायंस पावर के प्रस्तावित 7,800 मेगावाट के मेगापावर प्लांट को भी मुहैया करानी थी। 7 मई, 2010 को आए सुप्रीम कोर्ट ने सब कुछ बदलकर रख दिया। इस फैसले से खुद आरएनआरएल के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान लग गया। सर्वोच्च अदालत ने आरएनआरएल और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच केजी बेसिन की गैस को लेकर हुए वर्ष 2005 के करार को रद कर दिया। इसके मुताबिक आरआईएल को यह गैस 2.34 डालर प्रति एमएमबीटीयू की दर पर अनिल की इस कंपनी को 17 वर्षो तक उपलब्ध करानी थी। अब आरआईएल यह गैस सरकार द्वारा तय कीमत 4.20 डालर प्रति एमएमबीटीयू पर ही उपलब्ध करा सकेगी। साथ ही अब गैस आपूर्ति की मात्रा भी सरकार तय करेगी। फैसले के मुताबिक पिछले महीने आरआईएल के साथ आरएनआरएल ने नए सिरे से गैस आपूर्ति का समझौता कर लिया। हालांकि इस समझौते में कीमत, मात्रा या गैस आपूर्ति की अवधि का जिक्र नहीं है।
आरपावर की ताकत
11 फरवरी, 2008 को लिस्टिंग के वक्त रिलायंस पावर का बाजार पूंजीकरण 1,23,000 करोड़ रुपये पहुंच गया था। हालांकि उसी दिन कंपनी का शेयर अपने इश्यू मूल्य 450 रुपये से नीचे आकर बंद हुआ था। कंपनी अब तक का देश का सबसे बड़ा आईपीओ लेकर आई थी। इसके जरिए अनिल की इस कंपनी ने 11,500 करोड़ रुपये जुटाए थे। विलय के बाद बनने वाली कंपनी का बाजार पूंजीकरण अकेले रिलायंस पावर के शुरुआती बाजार मूल्य के आधे से भी कम होगा। तब देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल यह कंपनी अब बाजार हैसियत के हिसाब से 30वें स्थान पर है। आरपावर ने तीन अलग-अलग 4,000 मेगावाट क्षमता वाली कोयला आधारित अल्ट्रामेगा परियोजनाएं भी हासिल की हैं। उत्तर प्रदेश के रोजा पावर प्लांट समेत अपनी परियोजनाओं के जरिए आरपावर फिलहाल तकरीबन 1200 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रही है।
शेयर बाजार की हलचल
हालांकि विलय संबंधी बयान शेयर बाजार बंद होने के बाद जारी किया गया, लेकिन इस संबंध में अटकलों के चलते दोनों ही कंपनियों के शेयरों खासी उठापटक देखी गई। कारोबार के दौरान 7 फीसदी से ज्यादा लुढ़कने के बाद बीएसई में आरएनआरएल का शेयर करीब 2 प्रतिशत टूटकर 63.65 रुपये के भाव पर बंद हुआ। वहीं रिलायंस पावर का शेयर 3.33 फीसदी तेजी के साथ 175.15 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसके शेयर में 5 फीसदी तक की तेजी आई।