भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड [बीसीसीआई] की शनिवार को होने वाली विशेष बैठक में आईपीएल के निलंबित कमिश्नर ललित मोदी के भविष्य का फैसला किया जाना है और माना जा रहा है कि यह बैठक मोदी को बोर्ड से निकालने की दिशा में बढ़ाया जा रहा पहला कदम है। बीसीसीआई के सचिव एन श्रीनिवासन ने हालांकि कहा है कि यह विशेष महासभा [एसजीएम] मोदी पर लगे आरोपों की जांच को अनुशासन समिति को सौंपने के उनके फैसले पर मुहर लगाने के लिए बुलाई गई है। यह मामला एसजीएम की बैठक के एजेंडा में तीसरे और अंतिम स्थान पर रखा गया है लिहाजा इससे कुछ सवाल भी पैदा हुए हैं। बोर्ड मुख्यालय में शनिवार दोपहर तीन बजे शुरू होने वाली बैठक में मोदी के खिलाफ जारी तीन कारण बताओ नोटिसों में लगाए गए आरोपों की जांच का काम अनुशासन समिति को सौंपने की कार्रवाई को मंजूरी दिए जाने की संभावना है।
इस बैठक में मोदी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अनुशासन समिति का पुनर्गठन भी किया जाएगा क्योंकि उसके सदस्य रहे बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर ने आईपीएल के निलंबित प्रमुख की गुजारिश पर खुद को समिति से अलग कर लिया था। आईपीएल के संचालन से संबंधित विचार-विमर्श करना तथा अन्य समुचित फैसले लेना एजेंडा का तीसरा महत्वपूर्ण विषय होगा। श्रीनिवासन ने एक टेलीविजन चैनल से साक्षात्कार में साफ तौर पर कहा था कि मोदी के मामले में एसजीएम कोई अंतिम फैसला नहीं करेगी। इस बैठक में सिर्फ यह तय किया जाएगा कि निलंबित आईपीएल कमिश्नर के खिलाफ मामलों को अनुशासन समिति के पास भेजा जाए या नहीं।
श्रीनिवासन ने बृहस्पतिवार को कहा कि महासभा यह तय करेगी कि मोदी द्वारा अपने खिलाफ जारी तीन कारण बताओ नोटिसों पर दिए गए जवाब को 'अस्वीकार्य' करार देने के बीसीसीआई सचिव के फैसले को अनुमोदन दिया जाए या नहीं। अगर श्रीनिवासन की राय की पुष्टि की जाती है तो एसजीएम अनुशासन समिति को पुनर्गठित करके मनोहर, चिरायु अमीन और अरुण जेटली की जगह दूसरे सदस्यों को समिति में शामिल कर सकती है।
श्रीनिवासन ने कहा था, 'बैठक के एजेंडा में मामले को अनुशासन समिति को रेफर करने की सचिव की कार्रवाई की पुष्टि करना भी शामिल है। ऐसा होने पर समिति को पुनर्गठित किया जाएगा।' बीसीसीआई के संविधान के मुताबिक किसी क्रिकेट प्रशासक सदस्य को निष्कासित करने के लिए खासतौर पर बुलाई जाने वाली एसजीएम में अंतिम फैसले के लिए तीन चौथाई सदस्यों का समर्थन हासिल करना जरूरी है।
मोदी के जाने-पहचाने समर्थकों के इस बैठक में हिस्सा नहीं लेने के फैसले के मद्देनजर एसजीएम में निलंबित आईपीएल आयुक्त के चंद समर्थक ही जुटने की संभावना है। बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष इंदरजीत सिंह बिंद्रा को मोदी का धुर समर्थक माना जाता है और वह पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन [पीसीए] की तरफ से महासभा में शामिल नहीं होंगे। खबरों के मुताबिक एम पी पांडोव पीसीए का प्रतिनिधित्व करेंगे।
मोदी कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन [केएससीए] और आईपीएल की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर की टीम के फ्रेंचाइजी विजय माल्या से भी समर्थन की उम्मीद नहीं कर सकते। माल्या बीसीसीआई की विशेष आमसभा में शामिल नहीं होंगे। बैठक में केएससीए का प्रतिनिधित्व उसके अध्यक्ष श्रीकांत दत्ता नरसिंहराजा वाडियार करेंगे।