ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून पर हस्ताक्षर करने के बाद भी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि ईरान के लिए कूटनीति के रास्ते अब भी खुले हुए हैं। ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद इस्लामिक देश के गैसोलीन, आर्थिक, बीमा और परिवहन क्षेत्र पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। प्रतिबंधों के बाद सभी देशों पर ईरान को संशोधित पेट्रोलियम निर्यात करने पर प्रतिबंध लग गया है। इसके अलावा अमेरिकी आर्थिक संस्थानों पर अब ईरान के रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स को मदद देने पर भी प्रतिबंध लग गया है।
इसके अलावा, ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, तकनीक स्थानांतरण और इसके विकास को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। देशों को ऐसी कंपनियों से दूर रहने को कहा गया है, जो ईरान के साथ कोई व्यापार कर रही हैं।
सीनेट ने ईरान पर प्रतिबंधों को 24 जून को 99-0 मतों से पारित किया था, जबकि प्रतिनिधि सभा ने इन्हें 408-8 मतों से पारित किया था। ओबामा ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इन प्रतिबंधों के साथ हम ईरान सरकार को दिखाना चाहते हैं कि ये उसके कार्यो के परिणाम हैं। अमेरिका और वैश्विक समुदाय ईरान के हाथों में परमाणु हथियार जाने देने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं ओबामा ने यह भी कहा कि ईरान की सरकार के पास अब भी विकल्प है। उन्होंने कहा कि कूटनीति के दरवाजे अब भी खुले हैं। ईरान साबित कर सकता है कि उसके उद्देश्य शांतिपूर्ण हैं। वह एनपीटी के तहत अपने दायित्वों को पूरा कर सकता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सुरक्षा परिषद की तरह अमेरिकी विधेयक पुराने प्रतिबंधों को मजबूत करता है, नए प्रतिबंधों को अधिकृत करता है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से निपटने के लिए हमारी बहुआयामी कूटनीतिक रणनीति का समर्थन करता है। ओबामा के मुताबिक नए प्रतिबंधों से ईरान सरकार के लिए पेट्रोलियम खरीदना, तेल और प्राकृतिक गैस सेक्टर को आधुनिक बनाना मुश्किल हो जाएगा।