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समग्र वार्ता संभव नहीं वर्तमान हालात में

on मार्च 16,2010

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हाफिज सईद समेत मुंबई हमले के दोषियों के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर चिंता प्रकट करते हुए भारत ने अपने इस पड़ोसी देश को चेताया है कि वह उसके संयम को कमजोरी नहीं समझे। साथ ही यह भी कहा कि मौजूदा हालात में उसके साथ समग्र वार्ता की शुरुआत मुश्किल है।

वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक विड्रो विल्सन सेंटर में एक पाकिस्तानी नागरिक के सवाल के जवाब में विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा कि कृपया इस बात को समझने का प्रयास करें कि पाकिस्तान में कुछ ऐसे संगठन हैं जो हिंसा के एजेंडे पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

पाकिस्तानी नागरिक ने पूछा था कि आखिर भारत पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता की बहाली से इनकार क्यों कर रहा है जो खुद आतंकवाद से पीड़ित देश है। राव ने कहा कि मैं हाफिज सईद और जमात-उद-दवा एवं लश्कर-ए-तैयबा का नाम नहीं लेना चाहती। लेकिन हम महसूस करते हैं कि वे पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं और मीडिया एवं चैनल के माध्यम से अपने एजेंडे [हिंसा] का प्रचार कर रहे हैं। इससे हम पर असर पड़ता है और लोग इसको लेकर चितिंत हैं।

विदेश सचिव ने कहा कि भारत में आम धारणा है कि हमने लंबे समय तक बहुत झेल लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में हमारे लिए इस बात पर तैयार होना बहुत ही कठिन है कि हम इन चिंताओं को एक तरफ रखकर आगे बढ़ें। यही कारण है कि समग्र वार्ता की बहाली मौजूदा स्थिति में बहुत ही कठिन है। उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ वार्ता के दरवाजे कभी बंद नहीं किए गए।

छह दिवसीय यात्रा पर यहां आईं राव ने कहा कि भारत ने हमेशा ही पाकिस्तान में हुए आतंकी हमलों की निंदा की है। राव ने इससे पहले अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता की बहाली तब तक नहीं हो सकती है जब तक वह यह गारंटी नहीं देता कि वह आतंकवाद को नियंत्रित कर सकता है।

राव ने कहा कि आज पाक दावा करता है कि वह यह गारंटी देने की स्थिति में नहीं कि वह आतंकवाद पर नियंत्रण कर सकता है। ऐसी स्थिति में भारत के लोगों, जो पहले से ही कई आतंकी हमलों से बुरी तरह प्रभावित हैं, से यह उम्मीद कैसे की जाए कि वे पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता की बहाली का समर्थन करेंगे।

राव ने कहा कि विश्व ने जिन लोगों को आतंकी घोषित किया है वे लगातार खुलेआम भारत के खिलाफ आक्रामक घोषणाएं कर रहे हैं। अब विभिन्न आतंकी संगठनों के बीच अंतर करना बेमतलब है क्योंकि वे गतिविधियों और विचारधारा की दृष्टि से बिल्कुल एक-दूसरे के साथ हैं। उन्होंने कहा कि हम लगातार इस बात की आवश्यकता पर बल देते आ रहे हैं कि सरकारों को आतंकी संगठनों और ढांचों को खत्म करने के लिए निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए। राव ने कहा कि अफगानिस्तान की सीमा पर सक्रिय आतंकियों और विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाकिस्तान को जो रक्षा सहायता दी जाती है उसके प्रति जवाबदेही मानक का पालन बहुत ही जरूरी है। दरअसल अतीत की ऐसी सहायता के प्रति भारत के अनुभव ने उसे सबक सिखाया है कि उसे भारत के खिलाफ एवं तनाव फैलाने के प्रति इस्तेमाल को लेकर सजग रहना चाहिए।

राव ने कहा कि खुलेआम हमले की धमकी एवं घातक खतरों के बावजूद भारत ने विश्वास बहाल करने के लिए कई गंभीर और सार्थक प्रयास किए हैं।राव ने कहा कि खुलेआम हमले की धमकी और घातक खतरों के बावजूद भारत ने विश्वास बहाल करने के लिए सार्थक प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पाकिस्तान के खिलाफ कोई आक्रामक योजना नहीं है और हम उसे हमेशा स्थिर और समृद्धशाली देश के रूप में देखना चाहते हैं। लेकिन हमें अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहना होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवाद सहित सभी लंबित मुद्दों के हल के बार-बार ईमानदार प्रयास किए हैं और हाल ही में पाकिस्तान के विदेश सचिव से उनकी मुलाकात उसी सिलसिले का हिस्सा है।

अफगानिस्तान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीयों पर हाल के हमले का उद्देश्य भारत को युद्ध प्रभावित इस देश से हटने के लिए मजबूर करना है लेकिन भारत हटने वाला नहीं है। भारत अफगानिस्तान में अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी सुरक्षा उपाय कर रहा है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान-पाक स्थिति का तत्काल कोई समाधान नहीं है और ऐसे में जबतक जरूरी है तबतक वर्तमान मार्ग पर चलते रहना अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के हित में है।


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