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लोकसभा में भारी हंगामा माया की माला पर

on मार्च 16,2010

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बहुजन समाज पार्टी की रजत जयंती के अवसर पर पार्टी प्रमुख मायावती को कथित तौर पर करोड़ों रुपये का नोटों का हार भेंट किए जाने के मुद्दे पर लोकसभा में मंगलवार को भारी हंगामा हुआ। सपा, कांग्रेस, भाजपा और जदयू सदस्यों के भारी हंगामे के कारण दो बार के स्थगन के बाद सदन की बैठक 12 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी गई।

लोकसभा के बजट सत्र के पहले चरण का आज अंतिम दिन था। सत्र का दूसरा चरण 12 अप्रैल से शुरू होना है और यह सात मई तक चलेगा।

सदन में शून्यकाल के दौरान सपा और कांग्रेस सदस्यों ने इस मुद्दे पर जमकर हंगामा किया, जिससे अध्यक्ष मीरा कुमार को सदन की बैठक 45 मिनट के लिए दोपहर एक बजे तक स्थगित करनी पड़ी। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव सहित उनकी पार्टी के सांसदों और कांग्रेस के जगदम्बिका पाल को कहते सुना गया कि मायावती को कथित तौर पर नोटों का जो हार पहनाया गया, उसकी कीमत दस से 15 करोड़ रुपये के बीच है।

भारी शोरगुल के बीच इन सदस्यों ने मामले की जांच कराने की मांग की और कहा सरकार पता लगाए कि यह धन कहां से आया। अध्यक्ष ने कहा कि शून्यकाल के लिए सूचीबद्ध मामलों को सदस्य उठाने दें लेकिन उनकी बात सपा सांसदों और पाल ने नहीं मानी, जिससे सदन की बैठक स्थगित करनी पडी।

पाल ने कहा कि मायावती द्वारा करोड़ों रुपये का नोटों का हार पहनना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है क्योंकि इसके धन के स्रोत का पता नहीं है। दोपहर एक बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सपा, कांग्रेस, जनता दल यू और भाजपा के सदस्यों ने इस मामले को पुन: उठाने का प्रयास किया।

उपाध्यक्ष करिया मुंडा ने इसी हंगामे के बीच नियम 177 के तहत विशेष उल्लेख के मामले सदन के पटल पर रखवाने की कार्यवाही पूरी की और उसके बाद कांग्रेस के संदीप दीक्षित को राष्ट्रीय हरित अधिकरण विधेयक पर अपनी बात रखने को कहा। सपा, भाजपा और कांग्रेस के सदस्य अपने अपने स्थानों पर खड़े होकर मायावती के हार का मामला उठाने लगे। वे उपाध्यक्ष से उन्हें उनकी बात रखने की इजाजत चाहते थे। केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने भी आसन से अनुरोध किया कि सदस्यों को दो मिनट में अपनी बात रखने की इजाजत दे दी जाए जिसका बसपा सदस्यों ने कड़ा विरोध किया।

हंगामा बढ़ता देख उपाध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दो बजे कार्यवाही पुन: शुरू होने पर यही नजारा था। इन दलों के सदस्य अपनी बात रखना चाहते थे। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि क्या फर्क पड़ जाएगा अगर उन्हें दो दो मिनट में अपनी बात रखने की इजाजत दे दी जाए। उसके बाद सदन की कार्यवाही चले और विधेयक पारित हो जाए। इसका बसपा के सदस्यों ने कड़ा विरोध किया। वे नहीं चाहते थे कि अब इस मुद्दे पर सदन में कोई चर्चा हो।

उपाध्यक्ष ने कांग्रेस के संदीप दीक्षित से विधेयक पर अपनी बात रखने को कहा लेकिन सदन में हंगामा जारी रहा। इस पर उपाध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 12 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी।



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