अमेरिका के कई विद्वानों और दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञों ने अमेरिकी सांसदों से कहा है कि आईएसआई मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंध बरकरार रखे हुए है और पाकिस्तान इसके नेताओं तथा इसके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना चाहता। लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान में इस्लामी आतंकवाद की बढ़ती महत्वाकांक्षा विषय पर गुरुवार को अमेरिकी कांग्रेस की एक विशेष सुनवाई में सांसदों ने इस बात पर चिंता जताई कि ओबामा प्रशासन के जबर्दस्त प्रयासों के बावजूद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई लश्कर-ए-तैयबा से संबंध बरकरार रखे हुए है और पाकिस्तान इस आतंकी संगठन के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं कर रहा।
पश्चिम और दक्षिण एशिया मामलों की अंतरराष्ट्रीय संबंध सदन समिति की उप समिति के अध्यक्ष गैरी एल एकरमैन ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा एक धर्मोन्मादी और काफी खतरनाक संगठन है। इसे जबर्दस्त आर्थिक मदद मिल रही है। यह अति महत्वाकांक्षी तथा पाक सेना से जुड़ा है। उन्होंने उल्लेख किया और यह वही पाकिस्तानी सेना है जिसे अमेरिका आधुनिक हथियार बेच रहा है। कांग्रेस समिति के समक्ष वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक मिडल ईस्ट इंस्टिट्यूट के मार्विन जी वीनबाम ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा पर सरकार द्वारा लगाए गए आधिकारिक प्रतिबंध के बावजूद आईएसआई इस संगठन से संबंध बरकरार रखे हुए है। उन्होंने कहा कि आईएसआई लश्कर को लगातार खुफिया सूचना और सुरक्षा मुहैया कराती रहती है और पाकिस्तानी अधिकारी लश्कर प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ कार्रवाई करने की इच्छा नहीं रखते।
यह उल्लेख करते हुए कि लश्कर-ए-तैयबा अमेरिकी हितों के कि लिए भी खतरा है हेरीटेज फाउंडेशन की लीसा कर्टिस ने कहा कि हाल की एक जनसभा में लश्कर नेता हाफिज मोहम्मद सईद का दिखना पाकिस्तान के इरादों पर संदेह जाहिर करता है। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी नीति की विफलता रही कि पाकिस्तान पर बहुत पहले ही लश्कर की नकेल कसने के लिए दबाव नहीं डाला जा सका।
कर्टिस ने कहा कि सभी आतंकी संगठनों को मिटाने के लिए अमेरिका को पाकिस्तान को इस बात के लिए राजी करना चाहिए कि वह उन सभी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करे जिन्हें उसने भारत के खिलाफ समर्थन दिया है।
मुंबई हमलों और बाद में हेडली से हुई पूछताछ से खुलासा हुआ कि लश्कर-ए-तैयबा पश्चिमी ठिकानों को निशाना बनाने की अंतरराष्ट्रीय क्षमता रखता है चाहे वह दक्षिण एशिया या कहीं भी स्थित हो।
पाकिस्तान के जाने माने विद्वान शुजा नवाज ने भी माना कि आईएसआई और लश्कर के बीच संबंध हैं। नवाज फिलहाल साउथ एशिया सेंटर, द अटलांटिक काउंसिल ऑफ यूनाइटेड स्टेट के निदेशक हैं। उन्होंने कहा कि लश्कर की भूमिका बढ़ रही है और इसका उद्देश्य भारत संभवत: अफगानिस्तान में भी अस्थिरता पैदा करने का है। अपने काम में यह भारत के सिमी और बांग्लादेश के हुजी जैसे संगठनों को शामिल कर रहा है जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
नवाज ने कहा कि मुंबई जैसा एक और हमला भारत और पाकिस्तान को संघर्ष में धकेल सकता है। सेना पाकिस्तान के तहरीक-ए-तालिबान को उखाड़ती हुई प्रतीत होती है लेकिन लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों से गंभीर खतरा है।