गृहमंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को कहा कि आतंकियों तथा संगठित अपराधियों को पकड़ने के लिए देश को व्यावहारिक प्रक्रिया विकसित करनी होगी जिन्होंने प्रौद्योगिकी की मदद से संपर्क के विभिन्न चैनल विकसित कर लिए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा कि आतंकी और संगठित अपराधी सूचना संचार प्रोद्यौगिकी सहित खुली और बचाव करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित कर चुके हैं।
गृहमंत्री ने कहा कि देश को समाधानों की जरूरत है जिसमें पुलिस नेतृत्व प्रतिकारक और अपराधियों के प्रति प्रतिरोधी कार्रवाई करने के लिए ठोस फैसले लेने की व्यावहारिक प्रक्रिया अपनाए। उन्होंने कहा कि हमारी भौगोलिक स्थिति की संघीय व्यवस्था में अपराध का दायरा इस काम को एक बड़ी चुनौती बना देता है।
चिदंबरम ने कहा कि आज हम व्यक्तिगत पिचों पर अपनी लड़ाइयां लड़ रहे हैं। हमें जुड़ने समन्वय करने और छोटे तथा बड़े दोनों स्तरों पर अपने प्रयासों को कार्यान्वित करने की आवश्यकता है।
गृह मंत्रालय की दो हजार करोड़ रुपए की क्राइम क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स [सीसीटीएनएस] महत्वाकांक्षी परियोजना का उल्लेख करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के लिए सीसीटीएनएस को अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए एक फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि सीसीटीएनएस के जरिए हम अपराध और अपराधियों तथा उनके बायोमेट्रिक विवरण का डाटा बैंक तैयार करना चाहते हैं।
इस डाटाबेस का अदालतों, जेलों, आव्रजन और पासपोर्ट कार्यालयों जैसी अन्य 21 एजेंसियों के डाटाबेस के साथ आदान प्रदान किया जाएगा। बाद में इसे नैटग्रिड के जरिए देश की अन्य राष्ट्रीय एजेंसियों तक विस्तारित किया जाएगा ताकि अपराध एवं आतंक से अधिक पेशेवर ढंग से लड़ा जा सके।
चिदंबरम ने कहा कि ऐसा तंत्र भी बनाया जाएगा जिससे ऑनलाइन शिकायतों का पंजीकरण पुलिस थानों में दर्ज मामलों का स्तर जानने तथा व्यक्तियों की प्रमाणिकता आदि जैसी सुविधाएं प्रदान की जा सकें। उन्होंने हालांकि सीसीटीएनएस परियोजना के कार्यान्वयन में शुरुआती विलंब पर निराशा जताई। गृहमंत्री ने कहा कि हालांकि सीसीटीएनएस परियोजना का शुरुआती आसान काम पूरा हो चुका है लेकिन महत्वपूर्ण काम किया जाना अभी बाकी है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो इस काम को प्रभावी ढंग से तथा समय पर पूरा करने में सफल होगा।