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भारत को जीतना सिखाया था हजारे ने

on मार्च 10,2010

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सौरव गांगुली, मोहम्मद अजहरुद्दीन और महेंद्र सिंह धौनी ने भले ही कप्तान के रूप में सफलता की नई इबारत लिखी हों लेकिन भारत को जीतना पूर्व दिग्गज क्रिकेटर विजय सैमुअल हजारे ने सिखाया था जिनकी अगुवाई में टीम इंडिया ने टेस्ट पदार्पण के दो दशक बाद पहली बार जीत का स्वाद चखा था।

भारत ने टेस्ट दर्जा मिलने के लगभग 20 साल बाद अपने 25वें टेस्ट में हजारे की अगुवाई में 1951-52 में मद्रास में इंग्लैंड को हराकर पहली बार टेस्ट क्रिकेट में जीत का परचम लहराया था। टीम इंडिया ने इस मैच में पारी और आठ रन की जीत के साथ इतिहास रचा था। हजारे की अगुवाई में हालांकि टीम इसके बाद एक भी जीत दर्ज नहीं कर पाई। इस भरोसेमंद बल्लेबाज ने 14 मैचों में टीम की कमान संभाली थी। एक ही जीत दर्ज कर सकी। हजारे का जन्म 11 मार्च 1915 को मराठी ईसाई परिवार में हुआ। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज के बारे में कहा गया कि वह नैसर्गिक कप्तान नहीं थे और इसका असर उनकी बल्लेबाज पर भी पड़ा।

टीम इंडिया में हजारे के साथी विजय मर्चेट ने तो इतना तक कह दिया कि कप्तानी ने हजारे को भारत का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज बनने से रोक दिया। उन्होंने एक बार कहा था, 'यह क्रिकेट की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है।' हजारे का 89 बरस की उम्र में लंबी बीमारी के बाद 18 दिसंबर 2004 को निधन हुआ। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने भी इस महान क्रिकेटर को पूरा सम्मान देते हुए उनके नाम पर घरेलू एक दिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट शुरू किया। संयोग से इस टूर्नामेंट का फाइनल मार्च में ही खेला जाता है।

जस्सू पटेल के साथ पद्म श्री से सम्मानित होने वाले पहले क्रिकेटर हजारे ने 30 टेस्ट में 47.65 की प्रभावी औसत से 2192 रन बनाने के अलावा प्रथम श्रेणी मैचों में 58.38 आठ की बेजोड़ औसत से 18,740 रन बटोरे जिसमें 60 शतक शामिल हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सात शतक और नौ अ‌र्द्धशतक भी जमाए और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 164 रन रहा। वह सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर के बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले तीसरे भारतीय हैं। घरेलू क्रिकेट में महाराष्ट्र, मध्य भारत और बड़ौदा की टीमों का प्रतिनिधित्व करने वाले हजारे को 1947-48 के भारत के पहले आस्ट्रेलियाई दौरे के लिए भी याद किया जाता है जब उन्होंने एडिलेड टेस्ट की दोनों पारियों में शतक जमाए। हालांकि आस्ट्रेलिया यह मैच पारी और 16 रन से जीत गया। उन्होंने दूसरी पारी में 145 रन बनाए जबकि उनके छह साथी खाता भी नहीं खोल पाए।

गुल मोहम्मद के साथ 1947 में रणजी ट्राफी फाइनल में बड़ौदा की ओर से होल्कर के खिलाफ 577 रन की साझेदारी का उनका प्रथम श्रेणी क्रिकेट का रिकार्ड भी लगभग 60 साल तक कायम रहा। वर्ष 2006 में श्रीलंका के कुमार संगकारा और महेला जयवर्धने ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 624 रन जोड़कर इस रिकार्ड को तोड़ा। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पहला तिहरा शतक जमाने का रिकार्ड भी हजारे के नाम ही है। इसके साथ ही दो तिहरे शतक जड़ने वाले भी वह पहले बल्लेबाज थे। वह इसके अलावा लगातार तीन टेस्ट में शतक और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अर्धशतकों का अर्धशतक लगाने वाले भी वह पहले भारतीय बल्लेबाज रहे।

हजारे ने बल्लेबाजी के अलावा गेंदबाजी में भी अपना जलवा दिखाया और 595 प्रथम श्रेणी विकेट चटकाए। उन्होंने 20 टेस्ट विकेट भी हासिल किए जिसमें उन्होंने महान बल्लेबाज डान ब्रैडमैन को तीन बार आउट किया। ईसा मसीह में गहरी आस्था रखने वाले हजारे के करियर में एक बार उनका मजहब भी आड़े आया था। उन्हें हिन्दू जिमखाना के लिए खेलने का न्यौता मिला जो काफी सम्मान की बात थी क्योंकि इससे भारतीय टीम में चयन तय माना जाता था। लेकिन विजय ने यह कहकर पेशकश ठुकरा दी कि वह ईसाई हैं। उन दिनों सिर्फ हिंदुओं को ही इस टीम के लिए खेलने की अनुमति थी।


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