मन को भाने वाले संगीत या मिश्री जैसे बोल जब हमारे कानों में गुंजते हैं उस समय हमारा मस्तिष्क क्या करता है दोनों के साथ अलग- अलग व्यवहार करता है या एक ही मानकर चलता है, यह हमेशा से ही वैज्ञानिकों के बीच गर्मागर्म बहस का मामला रहा है। न्यू साइंटिस्ट मैगजीन के मुताबिक जर्मनी के मैक्स प्लांक इंस्टीस्ट्यूट के वैज्ञानिकों के दल ने दावा किया है कि उन्होंने इस यक्ष प्रश्न का समाधान ढूंढ लिया है। उन्होंने बताया कि मनुष्य का मस्तिष्क सबसे पहले संगीत और उसके बोलों को साथ-साथ सुनता है, तथा और फिर एक जटिल प्रक्रिया के दौरान मस्तिष्क बोलों को समझता है। इसके बाद मस्तिष्क दोनों के साथ अलग-अलग व्यवहार करने लगता है।
उन्होंने संगीत सुन रहे एक व्यक्ति के एमआरआई से पता लगाया कि मस्तिष्क का सक्रिय हिस्सा कब संगीत पर ध्यान देता और कब वह गीत के बोलों पर अपना ध्यान लगाता है।
वैज्ञानिकों के दल ने पता लगाया कि न्योरोन्स एक ही स्पंदक से बार-बार प्रक्रिया करता है तो समय के साथ उनकी प्रतिक्रिया कमजोर होती जाती है। उन्होंने माना कि जब वे सिर्फ स्वर को घटाते बढ़ाते हैं और लय को वहीं रखते हैं तो सक्रियता मे कमी दिखाने वाले क्षेत्र अवश्य ही गीत के बोल पर काम कर रहे होंगे। उन्होंने छह विभिन्न गानों के चार सेट तैयार किए। जिसे 12 स्वयंसेवकों को सुनाया गया। इस दौरान उनके मस्तिष्क की स्कैनिंग की गई।
इस परीक्षण के बाद दल से जुड़ी शीर्ष वैज्ञानिक डेनिला सम्मलेर ने कहा कि मस्तिष्क सबसे पहले संगीत और उसके बोलों को एक साथ लेता है। इसके बाद मस्तिष्क एक जटिल प्रक्रिया से गुजरता है और बोलों को समझता है। बोलों को समझने के बाद मस्तिष्क दोनों के साथ अलग-अलग व्यवहार करने लगता है।