एक अमेरिकी विश्लेषक के अनुसार पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ 11 सिंतबर 2001 के बाद बदली अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति में पाकिस्तानी सेना की साख बहाल करने की खातिर 2006 में भारत के साथ एक खुफिया वार्ता में कश्मीर पर पाकिस्तान के पारंपरिक रुख को छोड़ने के लिए राजी हो गए थे। कश्मीर पर अनेक खोजी रिपोर्ट लिखने वाले पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित अमेरिकी पत्रकार स्टीव कोल का कहना है कि 11 सितंबर 2001 के बाद चरमपंथी समूहों के साथ अपने रिश्तों के चलते पाकिस्तानी सेना ने विश्व समुदाय में अपनी साख खो दी थी।
कोल ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग के समक्ष अपनी गवाही में कहा, 'सेना [पाकिस्तानी] ने यह असाधारण कदम उठाया। वह कश्मीर पर वार्ता में गई जिससे कश्मीर पर दशकों की नीति के उलटने का अनिवार्यत: खतरा हो गया था। यह दबाव नहीं बल्कि आकांक्षा थी जो उसे वार्ता की मेज तक ले गई।'
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, 'वे, खासतौर पर मुशर्रफ अंतरराष्ट्रीय वैधता और साख चाहते थे। वह चाहते थे कि अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में उन्हें शांतिकर्मी के रूप में बुलंद किया जाए। वह चाहते थे कि ओस्लो उन पर ध्यान दे।'