इस्लामाबाद। घर में नजरबंद करने के आदेश की अवहेलना करते हुए पाकिस्तान की मुख्य विपक्षी पार्टी पीएमएल एन के नेता नवाज शरीफ आज पूर्वी शहर लाहौर के अपने आवास से बर्खास्त न्यायाधीशों की बहाली के लिए हो रहे 'लांग मार्च' का नेतृत्व करने रवाना हुए और देशवासियों से सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शिरकत करने की अपील की।
पीएमएल एन प्रवक्ता सिद्दीक उल फारूक ने कहा कि शरीफ के छोटे भाई और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शहबाज घर में अपनी नजरबंदी का आदेश तामील किए जाने से पहले पुलिस को चकमा देकर भूमिगत हो गए। शहबाज छावनी शहर रावलपिंडी में अपने एक सहयोगी के आवास पर थे।
इससे पहले मीडिया की खबरों में कहा गया कि शहबाज को भी घर में नजरबंद कर दिया गया है। लाहौर में सैकड़ों विरोध प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ संघर्ष के बीच दो बार प्रधानमंत्री रहे 59 वर्षीय शरीफ अपने माडल टाउन स्थित आवास से इस्लामाबाद में संसद के बाहर धरने के लिए वाहन काफिले में रवाना हुए। हालांकि खबरों में कहा गया है कि पुलिस ने कुछ दूर पहले उन्हें रोकने की व्यवस्था की है।
इससे पहले अपने आवास से निकलते समय शरीफ ने लोगों से बंदिशों की अवहेलना करने और वकीलों तथा विपक्षी दलों द्वारा आयोजित 'लांग मार्च' में हिस्सा लेने की अपील की जो धरने में तब्दील होना है ताकि सत्तारूढ़ पीपीपी पर 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा बर्खास्त किए गए न्यायाधीशों को बहाल करने का दबाव बनाया जा सके।
उन्होंने कहा, भाइयों, चिंतित मत होइए। ये बाधाएं अस्थायी हैं। हमें निश्चित तौर पर उन्हें हटाना चाहिए और उसके बाद ही हम अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
इस महीने की 12 तारीख को शुरू हुए 'लांग मार्च' से एक दिन पहले पुलिस की एक बड़ी टुकड़ी ने इस्लामाबाद जाने के लिए लाहौर के जीपीओ चौक पर जमा हुए वकीलों, नागरिकों और पीएमएल एन, पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ तथा जमात ए इस्लामी के कार्यकर्ताओं को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले तथा रबर की गोलियां दागीं।
दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर पथराव किया और दंगा रोकने की तैयारी रखने वाली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की बेतों और लाठियों से पिटाई की। संघर्ष में कई लोग घायल हो गए और कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर पुलिस के वाहनों में ठूंस दिया गया।
इससे पहले सुबह पुलिस ने 20 से ज्यादा पीएमएल एन के उन कार्यकर्ताओंको गिरफ्तार किया जो माडल टाउन में शरीफ के आवास के बाहर बनाए गए एक शिविर में जमा हुए थे। पुलिस ने पीएमएल एन के कुछ अन्य नेताओं को भी घरों में नजरबंद किया जिनमें सीनेटर इसहाक डार, सांसद साद रफीक और पार्टी की लाहौर इकाई के अध्यक्ष जुल्फिकार खोसा शामिल हैं।
वकीलों के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पीपीपी के असंतुष्ट नेता ऐतजाज अहसन को भी घर में नजरबंद किया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री को घर में तीन दिन के लिए नजरबंद किए जाने की आधिकारिक सूत्रों के हवाले से टीवी चैनलों पर खबर आने के बाद उत्साहित समर्थकों को संक्षिप्त तौर पर संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा कि अन्याय, गरीबी, बेरोजगारी और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए 'लांग मार्च' आवश्यक है।
गृह मंत्रालय प्रमुख रहमान मलिक ने दावा किया कि शरीफ बंधुओं को घर में नजरबंद करने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।
शरीफ ने पीपीपी नीत सरकार पर 'लांग मार्च' रोकने का हर संभव प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ''उन्होंने मुझे नजरबंद किया, जिसे मैंने स्वीकार नहीं किया। वे जो कुछ कर रहे हैं वह गैर कानूनी है। उनकी अदालतें गैर कानूनी और असंवैधानिक हैं।'' खबरों में कहा गया है कि जमात ए इस्लामी नेता काजी हुसैन अहमद और तहरीक एक इंसाफ प्रमुख इमरान खान को हिरासत में लेने के भी आदेश जारी किए गए हैं। दोनों नेता भूमिगत हैं। पूर्व क्रिकेटर और राजनेता खान के इस्लामाबाद स्थित घर पर दर्जनों पुलिसकर्मियों ने छापा मारा और उसमें ताला बंद कर उसे सील कर दिया।
रावलपिंडी में पुलिस ने हाईकोर्ट परिसर में छापा मारा और इस्लामाबाद रवाना होने के लिए एकत्र हुए एक सौ से अधिक वकीलों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिसकर्मियों ने वकीलों की पिटाई की और हाईकोर्ट इमारत के मुख्य द्वार को बंद कर दिया।
इस्लामाबाद और रावलपिंडी में सड़कों पर बाधाएं खड़ी करने के लिए पुलिस ने मालवाहक कंटेनरों का इस्तेमाल किया। महत्वपूर्ण मुरी सड़क को भी रोक दिया गया और इस पर अतिरिक्त पुलिस तैनात की गई है। महत्वपूर्ण भवनों पर सेना की तैनाती के बीच हेलीकाप्टरों ने संघीय राजधानी के आसमान में उड़ाने भरीं।
पुलिस ने विपक्षी पार्टियों के कार्यालयों और नेताओं के घरों पर छापे मारे तथा पीएमएल एन, जमात ए इस्लामी तथा तहरीक ए इंसाफ पार्टी के कई कार्यकर्ताओं और नेताओं को गिरफ्तार किया। वकीलों और विपक्षी नेताओं ने कहा है कि अधिकारियों ने 'लांग मार्च' को नाकाम बनाने के इरादे से से मंगलवार से 1200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। ज्यादातर लोगों को 'मेंटेनेंस आफ पब्लिक आडर ला' के तहत या बिना किसी आरोप के हिरासत में रखा गया है।