मुंबई के आतंकी हमलों के मामले में पेश आरोपपत्र में पाकिस्तान के कंट्टरपंथियों में गहरी पैठ रखने वाले लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज मुहम्मद सईद का नाम पहले नंबर पर रख कर मुंबई पुलिस पाकिस्तान पर इंटरपोल का दबाव बढ़ाना चाहती है।
इस मामले के फरार आरोपियों की सूची में हफीज के अलावा 34 पाकिस्तानियों के नाम हैं। इन्हें आगे चलकर भगोड़ा भी घोषित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में हाफिज, जकी-उर-रहमान लखवी, अबू हमजा, अबू अल कामा, अबू काफा सहित मुंबई हमलों की योजना में शामिल सभी पाकिस्तानी नागरिकों को उसी प्रकार अपने देश में छुप कर रहना होगा, जैसे 1993 बम कांड के आरोपी दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन, अयूब मेमन और अनीस इब्राहिम को पाकिस्तान में अपनी पहचान छुपा कर रहना पड़ रहा है। इंटरपोल द्वारा भविष्य में जारी की जाने वाली रेड कार्नर नोटिस के चलते ये सभी आरोपी पाकिस्तान के बाहर भी जाने में खतरा महसूस करेंगे, क्योंकि इन्हें वहां भी गिरफ्तार किया जा सकेगा। यदि उस देश के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि हुई तो अबू सलेम की तर्ज पर वह देश इन्हें भारत को सौंप भी सकेगा।
इसके बावजूद मुंबई पुलिस एवं भारत सरकार की यह नीति पाकिस्तान एवं इन आरोपियों पर दबाव बनाने के ही ज्यादा काम आ सकती है। इनकी गिरफ्तारी एवं प्रत्यर्पण की संभावनाएं न के बराबर ही मानी जा रही हैं। अतीत में इस प्रकार के गंभीर मामलों के ज्यादातर फरार आरोपियों के साथ ऐसा ही होता रहा है। 12 मार्च, 1993 के 30 भगोड़े आरोपी आज भी फरार हैं। ये सभी भारतीय नागरिक हैं, लेकिन इनमें से 70 फीसदी पाकिस्तान में ही अपनी पहचान छुपा कर रह रहे हैं। दाऊद के तो बच्चों की शादी भी पाकिस्तान के मशहूर परिवारों में हुई है और भारत या इंटरपोल कुछ नहीं कर सका है। इसी प्रकार दो साल पहले हुए मुंबई ट्रेन धमाकों के भी 15 आरोपी फरार घोषित हैं। इनमें 10 पाकिस्तानी नागरिक हैं और पांच भारतीय।