चीन के विदेश मंत्री यांग जेएची के साथ बैठक के दौरान तिब्बत मुद्दा उठाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उम्मीद जताई कि विवादास्पद मसले पर चीन और दलाईलामा के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता में प्रगति हासिल होगी। तिब्बत मुद्दे पर चीन की असहजता के बावजूद ओबामा ने व्हाइट हाउस के ओवल आफिस में यांग के साथ बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाया। बैठक के बाद व्हाइट हाउस ने एक वक्तव्य जारी कर कहा, 'राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई है कि चीन सरकार और दलाईलामा के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में प्रगति होगी।' बैठक के दौरान ओबामा ने कहा कि मानवाधिकारों को बढ़ावा देना अमेरिका की वैश्विक विदेश नीति का एक अनिवार्य पहलू है।
व्हाइट हाउस ने वक्तव्य में कहा, 'मानवाधिकारों के संबंध में राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि इसे बढ़ावा देना अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय विदेश नीति का एक जरूरी पहलू है।'
इससे पहले, पिछले सप्ताह अमेरिका ने तिब्बत में मानवाधिकार की स्थिति पर चिंता जताई थी और कहा था कि दलाईलामा के प्रतिनिधियों के साथ 'ठोस बातचीत' से ही क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति आ सकती है।
व्हाइट हाउस प्रवक्ता राबर्ट गिब्स ने बीते मंगलवार कहा, 'हमारा मानना है कि दलाईलामा के प्रतिनिधियों के साथ ठोस बातचीत लंबे समय से चले आ रहे मसलों को हल करेगी और यही [बातचीत ही] तिब्बत में दीर्घकालिक स्थायित्व हासिल करने का बेहतर तरीका है।' चीन ने इस वक्तव्य पर अपनी नाखुशी जाहिर की थी।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मा जाओक्सू ने बीजिंग में कहा था, 'हम इस मुद्दे पर गहन चिंता जताते हैं।' उन्होंने कहा, 'तिब्बत का मुद्दा विशुद्ध रूप से चीन का घरेलू मुद्दा है। चीन सरकार और उसकी जनता तिब्बत मुद्दे के परिप्रेक्ष्य में चीन के आंतरिक मामलों में किसी भी देश या व्यक्ति के हस्तक्षेप का हमेशा की तरह विरोध ही करेगी।'