भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनय कटियार ने कहा कि देवबंद ने उन्हें 1983 में ही मंदिर निर्माण के लिए सहमति पत्र दे दिया था। इसके पीछे देवबंद का यह मानना था कि बलात बनाई गई मस्जिद में अता की गई नमाज को खुदा स्वीकार नहीं करता। कटियार शुक्रवार को अपने आवास हिंदूधाम में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सात अक्टूबर 1984 को उनकी अयोध्या-लखनऊ पदयात्रा के दौरान फैजाबाद के चौक सहित अनेकों स्थानों पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उनका स्वागत कर प्रसन्नता जतायी थी। उन्होंने कहा कि 1991 में सूबे में कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद वे मुस्लिम समुदाय के विशिष्ट लोगों को लेकर मुख्यमंत्री से मिले थे।
इस दौरान मुस्लिम समुदाय ने उन्हें ज्ञापन देकर मंदिर निर्माण पर कोई एतराज न होने की बात कही थी। कटियार ने कहा कि यह ऐसा दौर चल रहा है जब पूर्वाग्रहों को त्यागने का वक्त आ गया है।
उन्होंने कहा कि धर्मातरित होकर मुस्लिम बने लोग पुन: अपने धर्म में वापस लौटें, इसके लिए हिंदुओं को अपना दिल बड़ा करना होगा। उन्होंने याद दिलाया कि 1983 में आसपास जम्मू-कश्मीर के नेता शेख अब्दुल्ला ने खुद को ब्राह्माण बताया था।