मुंबई आतंकी हमलों में जांच की रफ्तार धीमी पड़ने से नाखुश अमेरिका को भारत ने सफाई दी है कि ऐसा पाकिस्तान की वजह से हो रहा है। अमेरिकी प्रशासन को भारत ने बता दिया है कि 26/11 के हमलावरों को सजा दिलाने के लिए पाक को अभी बहुत कुछ करना है। इसके लिए भारत ने इस्लामाबाद को बहुत से साक्ष्य मुहैया कराए हैं। सूत्रों के अनुसार अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और ओबामा प्रशासन के दूसरे अहम अधिकारियों से वाशिंगटन में मुलाकात के दौरान विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने अपना पक्ष कुछ इस तरह से रखा। उनका मकसद अमेरिका को यह सफाई देने का था कि मुंबई कांड में मौजूदा जांच के धीमे पड़ने में भारत का कोई दोष नहीं है।
सूत्रों के अनुसार उन्होंने दो टूक कह दिया कि पाक में मौजूद आतंकी ढांचों को नष्ट करने के लिए इस्लामाबाद ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। जबकि भारत की तरफ से दिए गए पुख्ता सबूत इसके लिए ठोस आधार प्रदान करते हैं। जाहिर है कि मेनन ओबामा प्रशासन को यह समझाने की कोशिश कर रहे थे कि आतंकी ढांचे को नष्ट करना मुंबई कांड से जुड़ी एक जरूरी कार्रवाई है, जो पाक ने अभी तक नहीं की।
साउथ ब्लाक के कूटनीतिकार यही आकलन कर रहे हैं कि मेनन ने मुंबई कांड पर भारत का पक्ष काफी जोरदार ढंग से रखा। अमेरिकी राजधानी में मेनन ने कहा, 'पाकिस्तान मुंबई के हमलावरों को सजा दिलाने के लिए कुछ कदम तो उठा रहा है, लेकिन मकसद को हासिल करने के लिए उसे अभी बहुत कुछ करना बाकी है। उसे आतंकी ढांचा खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाना है।'
उन्होंने कहा कि भारत मुंबई कांड से जुड़े और साक्ष्य पाक को देने वाला है। हमलों से जुड़ी सारी जानकारियां भी पाक को दी जाएंगी, जो वह मांग रहा है। लेकिन भारत के दो लक्ष्य हैं जो पाक को हासिल करने होगे। पहला, मुंबई के हमलावरों को सजा दिलाने की हद तक जांच को आगे ले जाना। दूसरा अपनी जमीन पर आतंकी ढांचे को समूल नष्ट करना।
अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने सोमवार को मेनन के साथ मुलाकात में यह कह दिया था कि भारत और पाक के बीच चल रही कूटनीतिक लड़ाई की वजह से मुंबई कांड की तफ्तीश धीमी पड़ रही है और इसके तार्किक परिणति तक पहुंचने की उम्मीद भी खत्म होती जा रही है।