इस्लामाबाद/लाहौर। दक्षिण वजीरिस्तान कबायली इलाके में तालिबान के खिलाफ बड़े अभियान के संदर्भ में आतंकवादी खतरे की आशंका के चलते पाकिस्तान में स्कूल और शिक्षण संस्थाएं सोमवार से एक सप्ताह के लिए बंद कर दी गई हैं।
लाहौर, मुजफ्फराबाद और रावलपिंडी स्थित उन स्कूलों और शिक्षण संस्थाओं को भी एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है जिनका संचालन सेना कर रही है। क्वेटा और रावलपिंडी में संघीय सरकार द्वारा संचालित स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं।
लाहौर में सेना के एक अधिकारी ने बताया कि दक्षिण वजीरिस्तान में सैन्य अभियान को देखते हुए सुरक्षा संबंधी कारणों से अधिकारियों ने स्कूल बंद करने का निर्णय किया।
अधिकारी के अनुसार, ऐसी खबरें थीं कि तालिबान शिक्षण संस्थाओं को, खास कर छावनी इलाकों में स्थित शिक्षण संस्थाओं को, वजीरिस्तान और अन्य कबायली इलाकों में सैन्य अभियान बंद करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से निशाना बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि तालिबान उग्रवादी हताश हो चुके हैं और कोई भी कदम उठा सकते हैं।
संघीय राजधानी में कई प्रमुख निजी स्कूलों के बाहर नोटिस लगे हैं, जिसमें कहा गया है कि स्कूल तीन दिन के लिए बंद हैं। पेशवर में स्कूल और कालेज तीन दिन के लिए बंद किए गए हैं।
अधिकारियों ने छावनी इलाके तथा रिहायशी कालोनियों में स्थित निजी स्कूलों को शनिवार तक बंद रखने तथा सुरक्षा कड़ी करने का आदेश दिया है। इन स्कूलों का निर्माण सेना ने किया है। देश भर के अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को प्रांतीय शिक्षा विभाग ने निजी सुरक्षा गार्ड तैनात करने, दीवारें ऊंची करने और सुरक्षा कैमरे लगाने का आदेश दिया है।
पूर्व में तालिबान, पश्चिमोत्तर प्रांत में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों और सह शिक्षा स्कूलों को निशाना बना चुका है। पुलिस को उन स्कूलों की सूची बनाने के लिए कहा गया है जहां सुरक्षा के इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया स्कूल प्रशासन को अपने स्वयं के सुरक्षा बल तैनात करने होंगे क्योंकि पुलिस विभाग के पास मानव संसाधन की कमी है। संघीय गृह मंत्रालय ने प्रांतीय सरकारों और अधिकारियों से इस्लामाबाद में आतंकवादी हमले नाकाम करने के लिए पूर्ण सुरक्षा उपाय करने के लिए कहा है। चौकियों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। वाहनों की जांच जारी है।