अमेरिकी कांग्रेस के शक्तिशाली नेताओं और ओबामा प्रशासन के अधिकारियों ने पाकिस्तान की उसके क्षेत्र के अंदर आतंकियों से सफलतापूर्वक लड़ने की क्षमता और इच्छा पर संशय जताया है। अमेरिकी कांग्रेस में वर्तमान और भविष्य में विश्व के खतरों के बारे में रिपोर्ट पेश होने के दौरान सदस्यों ने कहा कि पाकिस्तान के इतिहास को देखते हुए उसकी पूरे मन से आतंकियों के खिलाफ जंग छेड़ने की इच्छा पर संशय है। कांग्रेस के सदस्यों ने यह भी कहा कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे कई आतंकी संगठनों को पाकिस्तान से समर्थन मिलने का भी संदेह है।
सीनेट की सशस्त्र सेवाओं की समिति के समक्ष नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक डेनिस ब्लेयर और रक्षा खुफिया एजेंसी के निदेशक माइकल मेपल्स ने कहा कि पाकिस्तान गत एक वर्ष से आतंकियों के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है, पर उसके नतीजे मिलेजुले हैं।
ब्लेयर ने कहा कि वर्ष 2008 में पाकिस्तान ने आतंकवाद निरोधी कोशिशें तेज कर दी थीं लेकिन आतंकियों के साथ निपटने का उसका रिकार्ड मिलाजुला रहा है। उसकी आंतरिक और आतंकवाद निरोधी प्राथमिकताएं एक दूसरे से उलझी हुई है।
ब्लेयर ने कहा कि सरकार उत्तर और पश्चिम में अपना प्राधिकार खो रही है। देश के अधिकतर विकसित हिस्सों में आर्थिक संकट और सरकार के खराब शासन को लेकर रोष बढ़ रहा है, जिसकी वजह से ज्यादा चरमपंथ उत्पन्न हो रहा है।
सीनेट की सशस्त्र सेवाओं की समिति के अध्यक्ष कार्ल लेविन ने कहा कि बहरहाल, मुझे संशय है कि क्या पाकिस्तान निकट भविष्य में उल्लेखनीय बदलाव ला सकता है या ला सकेगा। पाकिस्तान की सामरिक सुरक्षा नीति में मूल बदलाव आने में समय लगेगा। उन्होंने कहा कि लेकिन हम अलकायदा के खिलाफ अफगानिस्तान या अमेरिकी रक्षा में प्रगति नहीं कर सकते क्योंकि यह पाकिस्तान के समीकरण और उसकी क्षमताओं पर निर्भर है।
लेविन ने कहा कि आतंकी पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट खतरा बन गए हैं और अलकायदा एक बड़ा वैश्विक आतंकी खतरा बन गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और हमारे सहयोगियों को पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं पर ध्यान देने के विकल्पों को विकसित करने और पाकिस्तान को उसकी पूर्व नीतियों को मूल रूप से बदलने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।
दूसरी ओर, अमेरिकी सीनेट के एक पैनल ने कहा है कि प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैय्यबा कश्मीर में गतिविधियां चलाने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का पैदा किया हुआ संगठन है और उसका इस एजेंसी से रिश्ता बहुत चिंताजनक है।
प्रमुख सीनेटर हैरी रीड ने सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के समक्ष कहा कि लश्कर के आईएसआई से संबंध हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और लश्कर के रिश्ते बेहद चिंताजनक हैं।
अमेरिकी सेना की रक्षा खुफिया एजेंसी के निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल माइकल मेपल्स ने कहा कि दक्षिण एशिया में मुंबई में नवंबर 2008 में हुए हमलों से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के अलावा आतंकियों द्वारा विदेशी नागरिकों और यहूदी हितों को निशाना बनाए जाने से दक्षिण एशिया क्षेत्र में चिंताएं बढ़ी हैं।
यह वक्तव्य अमेरिकी विदेश मंत्रालय के यह कहने के एक दिन बाद आया कि मुंबई के आतंकी हमलों के षड्यंत्रकर्ताओं को न्याय के कटघरे में लाने के लिए पाकिस्तान को और प्रयास करने चाहिए।