Today is पेहला पन्ना | घरपृष्ठ निर्धारित करना | पसंदीदा मे जमा कर
वेबसाईट खोजे   प्रगतिशील खोज »
संपादक
Harish Lamba
(Editor and Chief)

ख़बरों में है दम, सबसे आगे हम
पुराख़बर
Mo Tu We Th Fr Sa Su
123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
28293031

न्यूज़पत्र
न्यूज़पत्र सबस्क्राईब करें:

Poll: आपके विचार
आप हमारी वेबसाइट के बारे में क्या सोचते हैं
यह वेबसाइट बड़िया है
कुछ ख़ास नही
थोड़े और काम की ज़रूरत है
बिल्कुल बड़िया नही
Poll परिणाम | पुरानी polls


email दोस्त को ई-मेल करें | print विवरण छापें |

महिलाओं के खिलाफ माहौल बदलेगा

on मार्च 10,2009

image

लखनऊ। मुझे तो इसका इल्म तक न था कि कालेज से लौटी मेरी बहन भी मुझसे एक गिलास पानी की अपेक्षा रख सकती है। लेकिन पिछले साल कला यात्रा के दौरान मैंने एक नुक्कड़ नाटक देखा, तब मुझे अहसास हुआ कि मा, बहन, बेटी और पत्‍‌नी की अपेक्षाएं भी होती हैं।

मैंने प्रेम विवाह किया था। शादी के कुछ दिन बाद से ही पति की प्रताड़ना का दौर शुरू हो गया। शुरू में लगा कि वो ऐसा ही है, फिर मुझे प्यार भी तो करता है और खामोश रही, सहती रही। एक दिन एक कार्यशाला के दौरान कुछ लोगों को संपर्क में आई और पता चला कि वो प्यार नहीं हिंसा है। आज मैं तलाक चाहती हूं।

राहुल और मंजू तो सिर्फ एक बानगी हैं। राजधानी ही नहीं बल्कि विभिन्न वर्ग और कार्यक्षेत्रों से जुड़े प्रदेश के ढाई लाख लोग ऐसे हैं जिन्होंने न केवल महिलाओं के खिलाफ हिंसा को समझा बल्कि खुद इसे खत्म करने की कोशिश में जुटे हैं। यह संभव हो पाया है सामाजिक असमानता की खायी पाटने में जुटी राजधानी की युवा ब्रिगेड के प्रयासों से।

दीपक, ऋषि, विनोद, उज्मा और जूली इस युवा ब्रिगेड में शामिल चंद ऐसे नाम है जिन्होंने मुमकिन है अभियान और साझी दुनिया के मंच से औरत के हक में हिंसा मुक्त और रूढि़ मुक्त समाज बनाने की मुहिम छेड़ रखी है। इनका यकीं है कि माहौल बदलेगा, लोगों की मन पर छाया अंधेरा छंटेगा और सुबह जरूर आएगी।


138 बार पड़ी गई


Breaking News
ख़ास ख़बर
hit counters