Today is पेहला पन्ना | घरपृष्ठ निर्धारित करना | पसंदीदा मे जमा कर
वेबसाईट खोजे   प्रगतिशील खोज »
संपादक
Harish Lamba
(Editor and Chief)

ख़बरों में है दम, सबसे आगे हम
पुराख़बर
Mo Tu We Th Fr Sa Su
1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031

न्यूज़पत्र
न्यूज़पत्र सबस्क्राईब करें:

Poll: आपके विचार
आप हमारी वेबसाइट के बारे में क्या सोचते हैं
यह वेबसाइट बड़िया है
कुछ ख़ास नही
थोड़े और काम की ज़रूरत है
बिल्कुल बड़िया नही
Poll परिणाम | पुरानी polls


email दोस्त को ई-मेल करें | print विवरण छापें |

सोमनाथ दा माकपा के मंच पर

on सितंबर 05,2009

image
पश्चिम बंगाल में माकपा के एक कार्यक्रम में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के शामिल होने के बाद पार्टी में उनकी वापसी को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। गुरुवार देर शाम दक्षिण 24 परगना में दिवंगत प्रणव सेन की स्मृति में माकपा द्वारा आयोजित सभा में सोमनाथ दा शामिल हुए थे।

वैसे इससे पहले सोमनाथ चटर्जी माकपा नेताओं के साथ कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे हैं। लेकिन ये सभी सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम थे। पिछले दिनों वह सुभाष चक्रवर्ती को श्रद्धांजलि देने उनके निवास पर गए थे। सुभाष की पत्नी रमला चक्रवर्ती के बुलावे पर वह अन्य कार्यक्रम में भी शामिल हुए। सुभाष चक्रवर्ती के आवास पर राज्य सचिव विमान बोस और मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से लेकर पार्टी के अधिकांश वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाकात हुई। दक्षिण 24 परगना में आयोजित स्मृति सभा विशुद्ध रूप से माकपा का कार्यक्रम था। जिसमें वह मुख्यमंत्री के करीब बैठे दिखे। दोनों के बीच काफी खुलकर बातचीत भी हुई। सभा के बाद चटर्जी ने संवाददाताओं के किसी भी सवाल का जवाब देने से इन्कार कर दिया।

स्मृति सभा को उन्होंने एक कट्टर माकपा नेता के तौर पर संबोधित किया। उनका कहना था कि हाल के दिनों में माकपा कार्यकर्ताओं पर सुनियोजित ढंग से हमले किए जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद राज्य के विभिन्न भागों में विपक्षी दलों की शह पर जिस तरह से माकपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया जा रहा है, उससे सत्तर के दशक की अराजक स्थिति की याद ताजा हो जाती है। चटर्जी ने हिंसा के विरोध में वामपंथी कार्यकर्ताओं से जनमत तैयार करने का आह्वान किया। उनके इस भाषण के बाद यह बहस छिड़ गई कि जब सोमनाथ दा माकपा से निकाल दिए गए हैं और पार्टी से उनका कोई लेना-देना नहीं तो उन्होंने इस तरह का भाषण क्यों दिया। जानकारों का कहना है कि सोमनाथ चटर्जी को पार्टी में फिर वापस लाने के लिए गंभीर प्रयास चल रहे हैं। राज्य माकपा के अधिकांश नेता चटर्जी से खुश हैं और पार्टी में उनकी वापसी के पक्ष में हैं। मुख्यमंत्री बुद्धदेव भंट्टाचार्य ने भी लोकसभा चुनाव के दौरान कहा था कि वह चटर्जी को पार्टी में लौटाने का अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। मंत्री कांति गांगुली ने कहा कि पार्टी से निकाले जाने के बावजूद चटर्जी हम सबके प्रिय हैं।


75 बार पड़ी गई

Breaking News
ख़ास ख़बर
hit counters