तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा समुद्री तूफान मोरकोट के पीड़ितों को सांत्वना देने ताइवान पहुंच गए हैं। पिछले 50 वर्षो के सबसे भयंकर समुद्री तूफान में पूरी तरह तबाह हो चुके एक गांव में दलाई लामा ने कहा कि ताइवान का चीन के साथ बड़ा घनिष्ठ और विशेष संबंध है। इसके बावजूद यहां जो लोकतंत्र है, वह सराहनीय है। चीन ने दलाई लामा की ताइवान यात्रा का कड़ा विरोध किया था। उसने चेतावनी दी थी कि इससे दोनों देशों के सुधरते संबंधों पर असर पड़ सकता है। दलाई लामा विपक्षी दलों के निमंत्रण पर यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी यह यात्रा गैर राजनीतिक और मानवीय है। उन्होंने कहा कि ताइवान को अपने लोकतंत्र को संभाल कर रखना होगा। दलाई लामा ने समुद्री तूफान में शियो लिन गांव के मारे गए 500 लोगों के लिए प्रार्थना की। अगस्त के शुरू में आए इस विनाशकारी तूफान में करीब 670 लोगों को मौत हो गई जबकि कई लोग लापता हो गए थे। सबसे ज्यादा तबाही शियो लिन गांव में हुई। एक स्थानीय निवासी ली मिंग ने कहा कि उनके आने से हम सभी बहुत खुश हैं।
दलाई लामा ने कहा कि पीड़ितों से मिलना उनका नैतिक दायित्व था। राष्ट्रपति मा यिंग जियु के नहीं मुलाकात करने से वह निराश नहीं हैं। यह मानवीय यात्रा है। इसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। चीन के लिए तिब्बत और ताइवान दोनों ही संवेदनशील मुद्दे हैं। चीन 1949 में अलग हुए ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। चीन से दोस्ती बढ़ाने को इच्छुक जियु ने एक बार पहले भी दलाई लामा को यात्रा की अनुमति नहीं दी थी। लेकिन इस बार विपक्षी दलों के अनुरोध को मान लिया।