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मंदी व सूखे की मार घरेलू बचत पर भारी पड़ेगी

on अगस्त 31,2009

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पहले ग्लोबल मंदी और अब सूखा। यानी करेला नीम चढ़ा। इस पर अगर महंगाई ने भी पैर फैलाने शुरू कर दिए तो क्या कहने। ये सारे तथ्य मिलकर आने वाले दिनों में आम आदमी की बचत क्षमता को काफी प्रभावित कर सकते हैं।

इस बात की आशंका भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भी व्यक्त की है। बैंक ने कहा है कि सकल घरेलू उत्पाद [जीडीपी] की तुलना में घरेलू बचत के स्तर को बढ़ाना अब बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रिजर्व बैंक [आरबीआई] ने कहा है कि सरकारी व निजी क्षेत्र की कंपनियों की बचत पर भी मार पड़ने वाली है। आरबीआई ने कहा है कि वर्ष 2001-02 में जीडीपी की तुलना में घरेलू बचत का स्तर 23.5 फीसदी था जो वर्ष 2007-08 में बढ़कर 37.7 फीसदी हो गया। इससे बड़ी परियोजनाओं के लिए सरकार की बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता बढ़ सकती है। साथ ही यह वित्तीय घाटे के लिए भी अच्छी बात नहीं होगी। आरबीआई ने इस रिपोर्ट में अक्टूबर के बाद महंगाई बढ़ने की संभावना जताई है। जाहिर है कि ऐसा होने पर आम आदमी की बचत पर और ज्यादा नकारात्मक असर पड़ेगा।

इस रिपोर्ट में रिजंर्व बैंक ने देश में बेरोजगारी की स्थिति को भी बेहद चिंताजनक बताया है। पिछले वर्ष ग्लोबल मंदी के चलते देश के कई हिस्सों में रोजगार जाने की खबर को आधार बनाते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इस बात के संकेत हैं कि यह समस्या पहले से ज्यादा बढ़ी है। हाल के महीनों में अर्थव्यवस्था में सुधार होने के बावजूद रिपोर्ट कहती है कि रोजगार सृजन के बढ़ने को लेकर कोई संकेत नहीं है। बैंक ने कहा है कि बेरोजगारी लंबी अवधि में देश की अर्थंव्यवस्था पर काफी विपरीत असर डालती है। सरकार को यह सुझाव दिया गया है कि जब अर्थंव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही हो, उस समय इस बात की व्यवस्था होनी चाहिए कि विपरीत परिस्थितियों में भी रोजगार के अवसरों में कमी नहीं आने पाए।

इसके साथ ही आरबीआई ने सरकार को चेताया है कि उसे देशी-विदेशी बहुराष्ट्रीय बैंकों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। आने वाले दिनों में वित्तीय सुधार को लेकर कोई भी कदम उठाया जाए तो इस बात का ध्यान रखा जाए ताकि घरेलू वित्तीय संस्थानों को सुरक्षित रखा जा सके। खास तौर पर ग्लोबल स्तर पर अचानक होने वाली अस्थिरता से अपने वित्तीय संस्थानों को बचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। हालांकि केंद्रीय बैंक यह भी मानता है कि बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के लिए इनके सेवा शुल्क में कमी होनी चाहिए। इसके लिए बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पद्र्धा को और बढ़ावा देने का सुझाव भी आरबीआई ने दिया है।


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