काठमांडू। नेपाल में राजशाही के खिलाफ माओवादियों के लंबे संघर्ष के दौरान 1200 से ज्यादा लोग लापता हो गए थे। सरकार पर अब इन लोगों का पता लगाने का दबाव बनाया जा रहा है। दस देशों के दूतावासों ने कूटनीतिक पहल करते हुए नेपाल सरकार से कहा है कि वह लापता लोगों का पता लगाने के लिए जांच आयोग गठित करने का अपना वादा निभाए।
राजतंत्र के खिलाफ करीब दस साल तक चले गुरिल्ला युद्ध के दौरान लापता हुए 1200 से ज्यादा लोगों की अब तक सरकार ने कोई खोज-खबर नहीं ली है। इस मुद्दे पर जांच आयोग गठित करने की मांग करने वालों में अमेरिका और ब्रिटेन के उच्चायोग भी शामिल हैं। इस मसले पर ब्रिटिश दूतावास की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है, हमने एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी आफ नेपाल [माओवादी] से उन लोगों का पता लगाने को कहा है, जिनका संघर्ष के दौरान माओवादियों ने अपहरण कर लिया था। हम इस मामले की जांच में सरकार का सहयोग करने को भी तैयार हैं। दूतावासों ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि वह सेना या जो भी अन्य सरकारी लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें सजा दिलाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाए।
दूतावासों की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि हम नेपाल सेना और माओवादियों से आग्रह करते हैं कि वे लापता लोगों के मामले में सहयोग नहीं करने का लंबे समय से जारी अपना रवैया बदलें। यह बयान अंतरराष्ट्रीय लापता दिवस के अवसर पर जारी किया गया।
रेडक्रास की अंतरराष्ट्रीय कमेटी का कहना है कि नेपाल में राजशाही के खिलाफ माओवादियों के गुरिल्ला युद्ध के दौरान वर्ष 2006 तक 1200 से अधिक लोग गायब हो गए। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो या तो नेपाल के सुरक्षा बलों के शिकार हुए या फिर माओवादियों के। संयुक्त रूप से यह अपील करने वाले देशों में आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, जापान, नार्वे, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं।