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रिलायंस कैग के सामने नतमस्तक होगी

on अगस्त 18,2009

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पेट्रोलियम क्षेत्र की कुछ निजी कंपनियों की तरफ से अपने खाते की जांच पड़ताल सरकारी एजेंसी कैग से करवाने में आनाकानी करने की खबर को पेट्रोलियम मंत्रालय ने काफी गंभीरता लिया है। मंत्रालय ने सोमवार को इस संदर्भ में रिलायंस इंडस्ट्रीज [आरआईएल], ब्रिटिश पेट्रोलियम समेत कुछ अन्य कंपनियों को बुला कर साफ कह दिया कि उन्हें कैग की जांच-पड़ताल में पूरा सहयोग देना ही होगा। वैसे मंत्रालय के लिए सुकून की बात यह है कि बैठक में रिलायंस सहित सभी कंपनियों ने कहा है कि वे अपने सभी बही-खातों की जांच पड़ताल नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक यानी कैग से करवाने के लिए तैयार हैं।

कृष्णा गोदावरी [केजी] बेसिन गैस के बंटवारे को लेकर अंबानी बंधु में चल रहे विवाद में पिछले दिनों यह बात सामने आई थी कि मुकेश की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कुछ कागजात कैग को उपलब्ध नहीं कराये थे। सोमवार की बैठक में रिलायंस ने बिल्कुल दूसरा ही पहलू पेश किया। कंपनी ने बताया कि वह केजी बेसिन के विकास और डी-6 ब्लाक में मिली गैस से संबंधित सभी खर्चे की आडिट करवाने के लिए तैयार है। कंपनी के अधिकारी ने पेट्रोलियम मंत्रालय को यह विश्वास दिलाया कि उसके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।

वैसे पेट्रोलियम मंत्रालय को यह बात भी कुछ खास अच्छी नहीं लगी है कि कैग इतने दिनों के बाद पूरे मामले को तूल दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2002 में जब नई अन्वेषण व लाइसेंसिंग नीति [नेल्प] के पहले दौर में तेल व गैस ब्लाकों की खोज व उत्खनन के लिए कंपनियों के साथ लाइसेंस समझौता किया गया था तभी कैग को कहा गया था कि वह पूरे मामले की आडिट करे। तब कैग ने यह कह कर मना कर दिया था कि उसे ऐसा करने का अधिकार नहीं है। इसके बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने सरकारी नियमों के मुताबिक बाहरी एजेंसियों को नियुक्त किया। ये एजेंसियां अभी तक नेल्प के तहत आरआईएल सहित अन्य सभी कंपनियों के खातों बही की जांच कर रही थीं। फिर वर्ष 2007 में कैग को फिर से कहा गया कि वह उन कंपनियों के खाते-बही की जांच करे, जिन्होंने उत्पादन शुरू कर दिया है। ये कंपनियां अभी तक सभी संबंधित रिपोर्ट हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय [डीजीएच] को दे रही थीं। कैग ने डीजीएच से रिपोर्ट मांग कर उनका अंकेक्षण [आडिट] किया। हाल ही में कैग की तरफ से यह कहा गया था कि रिलायंस की तरफ से उसे पूरे कागजात मुहैया नहीं कराए जा रहे हैं।

कोर्ट पहुंचे एनटीपीसी के शेयरधारक

नई दिल्ली। केजी बेसिन गैस के विवाद में अब सरकारी बिजली कंपनी एनटीपीसी के शेयरधारक भी कूद पड़े हैं। उन्होंने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसमें एनटीपीसी मैनेजमेंट को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह रिलायंस के साथ करार में तय कीमत पर गैस आपूर्ति के लिए कानूनी कदम उठाए। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और एनटीपीसी के बीच 2.34 डालर प्रति एमएमबीटीयू की दर पर गैस की आपूर्ति का समझौता हुआ था। आरआईएल इस कीमत पर गैस देने से इनकार कर चुकी है। रिलायंस का कहना है कि सरकार द्वारा तय 4.20 डालर प्रति एमएमबीटीयू से कम कीमत पर वह कंपनी को गैस नहीं मुहैया करा सकती है।

याचिका के मुताबिक एनटीपीसी और उसके अधिकारी इस तरीके से काम कर रहे है कि रिलायंस को सरकारी खजाने की कीमत पर 25 हजार करोड़ रुपये का भारी मुनाफा होगा। यह अर्जी ऐसे समय दायर की गई है, जब सरकार ने एनटीपीसी को सलाह दी है कि वह रिलायंस से करार की कीमत पर गैस आपूर्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करे। बंबई हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस मामले में फैसला मुकेश की कंपनी के पक्ष में दिया है। अभी मामला हाईकोर्ट में चल रहा है।



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